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बालोतरा पत्रिका.
पचपदरा में रिफाइनरी निर्माण के लिए अवाप्त की भूमि में नमक की खानों के जाने से प्रभावित हुए नमक उत्पादक समाज के लोगों को शीघ्र ही खानों को लेकर जमीन आंवटित की जाएगी। प्रदेश सरकार ने इसकी स्वीकृति जारी की है। इस पर प्रभावित लोग फिर से खाने बनाकर नमक उत्पादन का कार्य शुरू कर सकेंगे। इसके अभाव में वे बेरोजगारी का सामना कर रहे थे।
पचपदरा में रिफाइनरी निर्माण को लेकर प्रदेश सरकार ने हजारों बीघा भूमि अवाप्त की थी। इस पर बड़ी संख्या में नमक की खानें रिफाइनरी क्षेत्र में चली गई थी। जमीन अवाप्ति के बाद एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड के कार्य शुरू करने पर सैकड़ों नमक की खानें जमींदोज हो गई थी। इस पर नमक उत्पादक समाज ने विरोध जताते हुए नमक उद्योग के लिए जमीन, खानों का निर्माण करवाने के लिए आर्थिक मदद दिलाने आदि कई मांगें की थी। प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन ने एक कमेटी का गठन कर भूमि अवाप्ति से प्रभावित हुई खानों का सर्वें करवाया। इसमें 198 नमक खानेें प्रभावित होनी पाई गई। कमेटी ने प्रभावित लोगों को भूमि आंवटन के लिए हीरागढ़ क्षेत्र में 500 बीघा भूमि आवंटित करने की सिफारिश की। इसे स्वीकृत कर दिया है।इस पर शीघ्र ही प्रभावित नमक उत्पादक समाज के लोगों को खानों के निर्माण को लेकर जमीन आंवटित की जाएगी। इस पर वे नमक की खानें तैयार कर फिर से नमक उत्पादन कर सकेंगे।
पत्रिका ने उठाया था मुद्दा- 16 जनवरी को प्रधानमंत्री की ओर से रिफाइनरी के कार्य शुभारंभ से पूर्व इस मुद्दे को पत्रिका ने प्राथमिकता से उठाया था,जिसमें नमक उत्पादकों की समस्या को उजागर किया गया था। इस पर तत्काल राज्य सरकार ने जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांंगी थी।
व्यू- रिफाइनरी निर्माण को लेकर अवाप्त की जमीन से नमक खाने प्रभावित हुई थी। इससे प्रभावित नमक उत्पादक समाज को इनके निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध करवाने को लेकर सरकार ने स्वीकृति जारी की है। प्रभावित लोगों को शीघ्र ही नियमानसुार जमीन आंवटित की जाएगी। - शिवप्रकाश एम. नकाते, जिला कलक्टर
रिफाइनरी अभी शुरूआती दौर
- 500 करोड़ की लागत से हो रहे है कार्य
बालोतरा पत्रिका.
पचपदरा के पास सांभरा में रिफाइनरी का कार्य 12 हजार 34 बीघा भूमि में हो रहा है। जमीन समतलीकरण के लिए मिट्टी डलवाने, चार दीवारी, रिजर्व वॉटर स्टोरेज आदि का निर्माण कार्य किया जा रहा है। रिफाइनरी की 10985 बीघा व टाऊनशिप की 1049 बीघा जमीन में करीब एक मीटर औसत ऊंचाई में रेत डाल समतलीकरण किया जा रहा है। 3 मीटर ऊंचाई में 33 किलोमीटर दूरी में प्रस्तावित चारदीवारी में से 9 किलोमीटर तैयार हो गई है। 16 किलोमीटर दूरी में बनने वाली चार प्रमुख सड़कों में से 13 किमी दूरी में बन गई है। 40 किमी दूरी में बनने वाली सम्पर्क सड़कों का कार्य शुरू किया गया है। रिर्जव वॉटर टैंक निर्माण की खुदाई के साथ अर्थ वर्क का कार्य किया गया है। नाचना से पानी लाने का सर्वे कर रहे हैं। यह कार्य करीब पूरा हो गया है। वर्तमान में 500 करोड़ के कार्य चल रहे हैं। फोटो-राजेन्द्रसिंह विक्टर





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