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सालभर बाद भी 57 मौतों का कारण नहीं बता सकी सरकार

कोटा. पिछले साल कोटा में हुई ५७ मौतों में मरने वालों के परिजनों को अब भी मौत के कारणों का इंतजार है। विज्ञान के इस युग में सालभर में भी चिकित्सा विभाग इन लोगों की मौत के कारण नहीं बता सका है। इन सभी की मौत में डेंगू की आशंका जताई गई थी। इनका डेंगू का कार्ड टेस्ट भी पॉजीटिव आया था। इसके बाद चिकित्सा विभाग ने ४० जांच सैम्पल पुणे भेजे थे। उनकी रिपोर्ट का क्या हुआ, किसी को नहीं पता।

इधर, तमाम विभागीय दावों के बीच डेंगू अपना तेवर कम नहीं कर रहा, इस साल अब तक १८७ रोगी पॉजीटिव आ चुके हैं। विभाग दावे तो 'जंगÓ के कर रहा, लेकिन हकीकत में इसकी मुद्रा इस महामारी के आगे 'समर्पणÓ की ही दिख रही है।

शहर में साल २०१७ में डेंगू के कारण १८६३ पॉजीटिव रोगी सामने आए थे। ६५ लोगों की मौत हुई, लेकिन चिकित्सा विभाग ने उसमें से ५७ मौतों को 'डेंगू कन्फर्म नहींÓ कहकर नकार दिया था। विभाग ने सिर्फ ८ मरीजों को एलाइजा टेस्ट कन्फर्म पॉजीटिव को ही माना। महामारी का हल्ला विधानसभा और सरकार तक पहुंचा तो राज्य सरकार के निर्देश पर चिकित्सा विभाग ने दिसम्बर में पुणे प्रयोगशाला में ४० रक्त के नमूने भेजे थे, लेकिन उसके स्टेप की रिपोर्ट अब तक नहीं मिली है। नतीजा, इन मौतों का राज आज भी कागजों में दफन है। वैसे, डेंगू वायरस की चार स्टेप होती हैं। उसी स्टेप के अनुसार चिकित्सक मरीजों का इलाज करता है।

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कहर : सर्दी में भी रहा सक्रिय डेंगू

शहर में डेंगू पर नियंत्रण नहीं होने से गर्मी छोड़कर जनवरी व फरवरी में सर्दी के सीजन में भी डेंगू सक्रिय रहा। चिकित्सा विभाग की इस साल की रिपोर्ट देखें तो जनवरी से ही डेंगू के रोगी लगातार सामने आ रहे हैं।
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असर : चिकित्सा मंत्री दौड़े आए थे

शहर में पिछले साल डेंगू के तांडव से हाहाकार मचने के बाद खुद चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ कोटा आए थे। मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम में उन्होंने जनप्रतिनिधियों व चिकित्सा महकमे की संयुक्त बैठक ली थी। उस समय भी चिकित्सा मंत्री ने ८ लोगों का ही डेंगू से मरना माना, वजह बताई कि एलाइजा पॉजीटिव सिर्फ यही थे, कार्ड टेस्ट को उन्होंने डेंगू पॉजीटिव ही नहीं माना।

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सवाल: फिर ५७ लोगों की मौत कैसे हुई!

जब चिकित्सा विभाग ने ८ मरीजों को एलाइजा डेंगू पॉजीटिव से मृत्यु माना तो सवाल उठा कि आखिर ५७ लोगों की मौत कैसे हुई। जांच के लिए चिकित्सा मंत्री ने विभाग को ४० सैम्पल पुणे प्रयोगशाला भेजने के निर्देश दिए थे। विभाग ने दिसम्बर में नमूने भेजे, लेकिन जांच रिपोर्ट आज तक नहीं आई।

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इस साल आए डेंगू रोगी

माह- संख्या

जनवरी- १६

फरवरी-३१

मार्च- ३४

अप्रेल- २७
मई- १७

जून-१८

जुलाई- ८

अगस्त- ३५

कुल- १८७

(चिकित्सा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार)

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सरकारी दौड़-धूप : पांच माह, ५ लाख घरों का सर्वे और नतीजा सिफर

मार्च : घर-घर सर्वे

२१-२३ मार्च तक स्वास्थ्य दल घरों में पहुंचे। इसमें १६४३ टीमें जुटी, २ लाख २५ हजार ४७८ घरों का सर्वे किया गया।

अप्रेल : प्रभावित क्षेत्र में कवायद:
चिकित्सा विभाग ने ही डेंगू प्रभावित क्षेत्रों में १० -११ अप्रेल को विशेष अभियन चलाकर २३ हजार १०४ घरों का सर्वे किया। कौशल आजीविका निगम की ओर से १६ से २८ अप्रेल तक डेंगू की रोकथाम के लिए अभियान चलाया गया। इसमें ६० बच्चों ने घर-घर जाकर लोगों को जागरूक किया।

मई-जून: मेरा गांव-स्वस्थ गांव अभियान:

१ मई से ३० जून तक चले इस अभियान में गांवों में डेंगू के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने का कार्य किया गया।

जुलाई: हमारा स्वास्थ्य-हमारी जिम्मेदारी:
१६ से १८ जुलाई तक चले इस अभियान में २ लाख १ हजार ९११ घरों का सर्वे किया गया, १०३५ हजार टीमें लगी।

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वर्जन...

सरकार के माध्यम से पुणे प्रयोगशाला में ४० नमूने भेजे थे, लेकिन उसकी जांच स्टेप की रिपोर्ट नहीं आई। चिकित्सा विभाग अपने स्तर पर लगातार अभियान चलाकर डेंगू रोकथाम के लिए प्रयास कर रहा है। इसके सार्थक परिणाम भी सामने आए हैं।

- डॉ. आर.के. लवानिया, सीएमएचओ

 



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