कोटा. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने राजस्थान की इकलौती ओपन यूनिवर्सिटी को तगड़ा झटका दिया है। आयोग ने वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (वीएमओयू) में संचालित विज्ञान, तकनीकी और प्रबंधन की पढ़ाई पर अगले 5 साल के लिए रोक लगा दी है। यूजीसी ने इन विषयों के 9 पाठ्यक्रमों को इस बार मान्यता नहीं दी है।
यूजीसी का डिस्टेंड एजुकेशन ब्यूरो (डैब) हर साल खुला विश्वविद्यालयों में मौजूद शिक्षकों, संसाधनों और नोडल एजेंसियों से मिली मान्यता की समीक्षा करता है। जिसके आधार पर साल भर के लिए पाठ्यक्रम संचालित करने की अनुमति जारी की जाती है। शैक्षणिक सत्र 2017-18 के लिए डैब ने वीएमओयू में 37 स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित करने की अनुमति दी थी, लेकिन शुक्रवार को जारी आदेशों के मुताबिक शैक्षणिक सत्र 2018-19 के लिए सिर्फ 28 पाठ्यक्रम संचालित करने की ही अनुमति जारी की गई है।
पांच साल के लिए लगी रोक
डैब ने पहली बार पांच सालों के लिए पाठ्यक्रमों की संचालन अनुमति और मान्यता जारी की है। शुक्रवार को जारी आदेशों के मुताबिक वीएमओयू अगले पांच सालों तक बीएड, एमबीए, एमसीए, एमएससी फिजिक्स, एमएससी केमिस्ट्री, एमएससी बॉटनी, एमएससी जूलॉजी, एमएससी जियोग्राफी और एमएससी मैथ आदिपाठ्यक्रमों का संचालन नहीं कर सकेगी। ऐसे में स्नातकोत्तर स्तर पर विवि सिर्फ कला वर्ग के पाठ्यक्रमों का ही संचालन कर सकेगा।
यह रही वजह
वीएमओयू पिछले 31 सालों से विज्ञान विषय में स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित रहा है, लेकिन अभी तक विवि परिसर में साइंस लैब तक स्थापित नहीं की जा सकी है। वहीं पिछले चाल सालों से बीएड पाठ्यक्रम का एनसीटीई से निरीक्षण नहीं कराया गया। व्यवस्था से जुड़ी इन खामियों पर डैब ने पिछले साल ही सख्त रवैया अख्तियार किया था, लेकिन विवि प्रशासन एक साल बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं कर सका। जिसका खामियाजा विज्ञान, तकनीकि, शिक्षा और प्रबंधन के प्रमुख पाठ्यक्रमों बंदी के तौर पर चुकाना पड़ा है।
बिना मान्यता के कराई प्रवेश परीक्षा
पाठ्यक्रमों के संचालन पर रोक लगने से वीएमओयू की साख को खासी चोट पहुंची है। विवि प्रशासन ने डैब से पाठ्यक्रमों के संचालन की अनुमति मिले बिना ही शैक्षणिक सत्र 2018-19 में दाखिले देने के लिए बीएड और एमबीए की प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करा ली थी। एक हजार रुपए का परीक्षा शुल्क देकर दोनों की प्रवेश परीक्षाओं में 10 हजार से ज्यादा छात्र शामिल हुए थे। बीएड में तो परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्रों की सूची जार कर छात्रों को काउंसलिंग तक की तारीख दे दी गई थी, लेकिन अब मान्यता र² होने से दोनों ही विषयों में दाखिले नहीं हो सकेंगे। जिससे प्रवेश परीक्षा देने वाले छात्रों में खासा रोष है।
मुश्किल दौर
डैब ने जिन नौ पाठ्यक्रमों के संचालन की अनुमति खारिज की है उनमें सालाना औसतन 9140 छात्र प्रवेश लेते हैं। जिनसे विश्वविद्यालय को 185679850 रुपए की कमाई होती है। 5 साल तक पाठ्यक्रमों के संचालन पर रोक लगने के बाद विवि को करीब 100 करोड़ का घाटा तो झेलना ही होगा। साथ ही छात्रों के बीच साख भी कमजोर पड़ेगी सो अलग।





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