भवनेश गुप्ता / जयपुर। जयपुर डिस्कॉम ने किसानों के जले ट्रांसफार्मर को 72 की बजाय 6 घंटे में बदलने का दावा किया है। इसके लिए किसान ट्रांसफार्मर परिवर्तन योजना शुरू कर दी गई। इसके तहत बिजली मित्र एप या उपभोक्ता सेवा केन्द्र पर शिकायत कराने के तत्काल बाद ट्रांसफार्मर बदलने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। हालांकि, मौजूदा स्थिति में छह घंटे में ट्रांसफार्मर बदलने के दावे पर सवाल उठ रहा है। जयपुर डिस्काॅम में 4 लाख कृृषि उपभोक्ता हैं। वहीं, इस योजना के लागू होने से पहले लम्बित जले हुए ट्रांसफार्मर को निर्धारित नीति के तहत बदलने के लिए अधीक्षण अभियन्ता (ओ एण्ड एम) को जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
यह है नीति..
कृृषि कनेक्शन नीति, 2017 के अनुसार कृृषि उपभोक्ता द्वारा जले ट्रांसफार्मर की शिकायत 33/11 केवी. सब-स्टेशन पर संधारित शिकायत पुस्तिका में दर्ज कराई जाती रही है। सामान्य परिस्थितियों में जले या खराब ट्रांसफार्मर को 72 घंटे में बदले जाने का प्रावधान है।
एप डाउनलोड कराएंगे
मीटर रीडिंग के दौरान व अन्य माध्यमों से कृृषि उपभोक्ताओं को बिजली मित्र एप को डाउनलोड कराया जाएगा। उपभोक्ता सेवा केन्द्र के माध्यम से भी एप डाउनलोड करने की सुविधा होगी।
बिजली उत्पादन में 660 मेगावाट का इजाफा
इधर, राज्य में छबड़ा सुपर क्रिटिकल थर्मल विद्युत परियोजना की पांचवीं यूनिट से विद्युत उत्पादन का रास्ता आखिर साफ हो चुका है। यहां वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने से ऐसा हुआ। इससे प्रदेश में 660 मेगावाट अतिरिक्त वाणिज्यिक विद्युत उत्पादन होना शुरू हो गया। ऐसे में राजस्थान विद्युत उत्पादन लि. की विद्युत उत्पादन क्षमता 5957.35 से बढ़कर 6617.35 मेगावट हो गई। इससे पहले लगातार 72 घंटे तक परिचालन कर ट्रायल किया गया था। गौरतलब है कि इस इकाई का पहला आॅयल सिन्क्रोनाइजेशन अक्टूबर, 2016 को और कोल फायरिंग पिछले वर्ष फरवरी को किया गया था। छबड़ा सुपर क्रिटिकल थर्मल विद्युत परियोजना की नवस्थापित 660 मेगावाट क्षमता की पांचवीं इकाई के संचालित होने पर यहां से प्रतिदिन 1.584 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादन हो सकेगा। राज्य सरकार की ओर से छबड़ा थर्मल तापीय विद्युतगृह में दो सुपर क्रिटिकल इकाईयों के लिए मार्च, 2009 को स्वीकृति दी गई थी। दोनों सुपर क्रिटिकल इकाइयों के निर्माण पर 10,910 करोड़ की संभावित लागत आएगी।





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