सिरोही. केरल में भीषण बाढ़ से तबाही ने जब लोगों का जीना मुहाल कर दिया तो भारतीय नौसेना के जवानों ने ऑपरेशन मदद के तहत रेस्क्यू शुरू किया। इन जांबाज में शामिल रेवदर तहसील के गुलाबगंज निवासी रमेश कुमार प्रजापति ने 90 से ज्यादा लोगों की जान बचाकर मिसाल कायम की। बाढ़ पीडि़तों को उठाकर भागना एवं एयर लिफ्ट के लिए रस्सियों के साथ बांधकर ऊपर लेना उनके बाएं हाथ का खेल था।
रमेश बताते हैं कि ज्यादातर बुजुर्ग महिला, पुरुष और गर्भवती महिलाओं के लिए जान की बाजी लगाकर बचाने में सुकून मिला। रेस्क्यू टीम के सक्रिय सदस्य रमेश को अनुभव के कारण यह जिम्मेदारी मिली। कार्यकुशल गोताखोर के रूप में अत्यधिक उड़ान अनुभव का उपयोग करते हुए विषम परिस्थितियों में अदम्य साहस तथा सूझबूझ का प्रदर्शन किया। 16 अगस्त को
केरल में बाढ़ आई। बारिश, बादल तथा तेज हवा ने मौसम खराब कर दिया था।
रमेश कुमार के अनुसार जिम्मेदारी मिलते ही उन्होंने खोज एवं बचाव के उपकरण एकत्र किए। निर्धारित स्थान पर वायुयान से पहुंचकर मिशन शुरू किया। तेज हवा, बरसात एवं निचली सतह पर छाए बादलों के कारण पानी में फंसे लोगों का पता लगाना कठिन था फिर भी कामयाबी हासिल की। पायलट को बताकर सुरक्षा यंत्र और उपकरण के सहारे एक-एक कर लोगों को वायुयान में पहुंचाया। प्राथमिक चिकित्सा दी। 16 से 21 अगस्त तक लगातार उड़ान भरते हुए राहत सामग्री जैसे दवाई, खाना, पानी और कंबल 10,000 किलो तक पहुंचाए। इसमें साथियों का सहयोग भी रहा।
खून की खातिर तत्पर 'शौर्यमित्रÓ
आबूरोड. कहते हंै खून का रिश्ता सबसे बड़ा होता है। रक्तदान महादान माना जाता है। किसी दुर्घटना व इमरजेंसी केस में रक्त की आवश्यकता होने पर रक्तदाता को ढूंढना परेशानी का सबब बन जाता है। इसको देखते हुए शहर के कुछ युवाओं ने पहल की है। 'शौर्यमित्रÓ नामक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से शहर के कुछ युवा रक्त की जरूरत पडऩे पर तुरंत अस्पताल पहुंचकर मरीज की जान बचाने का कार्य कर रहे हैं। ग्रुप के संयोजक रवि शर्मा ने बताया कि मानवता हित में कार्य करने के लिए विचार आया तो लोगों को समय पर रक्त नहीं मिलने से परेशान होते देखा। इसके बारे में दोस्तों से राय ली। सभी ने ग्रुप बनाने की सलाह दी। शहर के कुछ समाजसेवी युवाओं को इसमें जोड़ा गया। वर्तमान में सभी मिलजुल कर कार्य में लगे हुए हैं। जरूरतमन्द लोगों की आवश्यकता पूरी करने के लिए सभी ग्रुप सदस्य तत्पर रहते हैं।
अशिक्षा व जागरूकता के अभाव में कम रक्तदान
ग्रुप के सह संयोजक प्रवीणसिंह परावा ने बताया कि आबूरोड तहसील जनजाति बाहुल्य क्षेत्र है। अल्पशिक्षा व जागरूकता की कमी के कारण युवा रक्तदान के लिए आगे कम आते हैं। इसलिए हमेशा रक्त की आवश्यकता रहती है। टीम रक्त की आवश्यकता की सूचना मिलने पर पूर्ति की कोशिश करती है। कई बार आवश्यक रक्तदाता ढूंढना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में शहर के विभिन्न इलाकों में निवासरत सदस्य एक दूसरे से सम्पर्क कर रक्तदाता को अस्पताल पहुंचाने में भी सहयोग करते हैं।





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