राजसमंद. समाज में व्याप्त अंधविश्वास के चलते आधुनिक जमाने में आज भी परिवार की महिलाएं डायन की कुप्रथा की आग में जल रही है। कुदरत से किसी महिला के लिए पतला शरीर, बड़े दांत, तीखी नाक ही उनकी जिदंगी का अभिशाप बन गया है। शरीर में आत्मा या डायन को निकालने के ढोंग में भोपे, तांत्रिक महिलाओं के शरीर को ही गर्म लोहे के दागकर, पीटकर, घसीटकर प्रताडि़त करने से भी नहीं हिचकते हैं। इस घिनौनी हरकत में परिजन भी तमाशबीन रहते हैं, मगर उसे रोकने के कोई प्रयास नहीं करते। अमानवीय प्रताडऩा से कई महिलाओं की जिदंगी खतरे में पड़ गई। गांव, ढाणी में ही नहीं, बल्कि शहरी क्षेत्र में भी लोग अंधविश्वास के चलते डायन प्रथा को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका खामियाजा अपनों को ही भुगतना पड़ रहा है।
अब तक नहीं भरे जख्म
जिले में कुंभलगढ़, आमेट, भीम, देवगढ़, खमनोर व राजसमंद तहसील क्षेत्र में गत आठ साल में दो दर्जन से अधिक मामले सामने आए। मोही में खुलेआम ग्रामीणों के समक्ष महिला के शरीर से डायन निकालने के ढोंग में गर्म लोहे के चिमटे से दाग दिया, तो, गजपुर के मोराणा गांव में गमेती परिवार की महिला को डायन बताकर गंभीर पिटाई कर दी। देवगढ़ क्षेत्र में बागरिया समाज की महिला के हाथ उबलते तेल में डालकर प्रताडि़त किया। पीडि़त महिलाएं आज भी वो पल याद कर सिहर उठती है।
जागरुकता के कोई प्रयास नहीं
अंधविश्वास व रुढ़ीवादिता के चलते तांत्रिक, ओझा, भोपा के चक्कर में परिजन अपनों से ही दूर हो रहे हैं। कथित तौर पर डायन घोषित कर महिला को गांव, समाज ही नहीं, बल्कि परिवार से ही अलग थलग किया जा रहा है, मगर न पुलिस व महिला अधिकारिता महकमा गंभीर है और न ही प्रशासन द्वारा ध्यान दिया जा रहा है। अव्वल तो अब तक डायन प्रथा की रोकथाम के लिए प्रशासन ही नहीं, समाजसेवा का दंभ भरने वाले संगठनों ने भी जनजागरुकता के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए।
एक्सपर्ट व्यू : समाज की घिनौनी करतूत
चेहरे पर कई बेबुनियादी खोट के बहाने महिला को डायन बताकर लोग व परिजन ही प्रताडि़त करते हैं। राजसमंद जिले में डायन की कुप्रथा का सर्वाधिक असर कुंभलगढ़ क्षेत्र में है, जहां अशिक्षा का अभाव भी है और आदिवासी अंचल का भी असर। विचारणीय तथ्य यह है कि डायन के आरोप पर परिवार के लोग ही उससे दूर हो जाते हैं। परिजन पीडि़ता के शरीर से डायन निकलवाने के लिए किसी भी हद तक जाने से भी नहीं चुकते हैं। प्रचेता व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं ग्रामीणों के मन से डायन के भ्रम को निकालने के प्रयास भी करते हैं, मगर समाज के कुछ समाजकंटकों की वजह से पूर्णतया अंकुश नहीं लग पा रहा है। जब तक परिजन जागरुक नहीं होंगे, तब तक महिलाओं को डायन का जुल्म सहना ही पड़ेगा।
शकुंतला पामेचा, संयोजक जिला महिला मंच
ये है प्रमुख केस.....
केस 1 : दिवेर थाना के टणका (खाखरमाला) में 22 जुलाई 2014 को डायन बताकर कतिपय लोगों ने महिला के शरीर को कई जगह से गर्म लोहे के सरिया से दाग दिया। बाद में पुलिस ने प्रकरण दर्ज जांच के बाद आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।
केस 2 : मोही में पूर्बिया समाज की एक महिला पर डायन का आरोप लगा। कुछ वर्षों पहले अन्य महिला ने भाव के ढोंग में पीडि़ता के शरीर से डायन निकालने की बात पर शरीर पर गर्म लोहे के चिमटा दाग दिया। दर्जनों लोग तमाशबीन देखते रहे। हालत ज्यादा बिगडऩे पर बीच बचाव में आधा दर्जन से अधिक महिलाएं घायल हो गई, जिनका अस्पताल में उपचार चला।
केस 3 : केलवाड़ा थाना क्षेत्र में छह माह पहले विधवा का बेटा भोला था। देवर के बेटे ने डायन का आरोप लगाते हुए विधवा से मारपीट की। महिला मंच के कार्यकर्ता के साथ पीडि़ता केलवाड़ा थाने में ज्ञापन दिया, तब पुलिस में प्रकरण दर्ज हुआ। एएसपी मनीष त्रिपाठी ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
केस 4 : फरारा के नोहरा की भागल में 7 सितंबर 2016 में एक सत्तर वर्षीय वृद्ध महिला को डायन कहकर प्रताडि़त करने के आरोप को लेकर राजनगर थाने में प्रकरण दर्ज हुआ। पुलिस के अनुसार नोहरा की भागल निवासी वृद्धा ने छह लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दी। इस पर राजनगर थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया।





No comments:
Post a Comment