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अटल भविष्यवाणी जो पच्चीस साल बाद सत्य हुई

श्रीगंगानगर.

राजनेता के रूप में विश्व में विशिष्ट पहचान बनाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का इस क्षेत्र से भी नाता रहा है। जनसंघ की राजस्थान प्रांत कमेटी की बैठक में हिस्सा लेने के लिए १९७१ में पहली बार वे श्रीगंगानगर आए। यह बैठक तीन दिन चली। लेकिन अटल जी एक दिन रुके। उस समय उन्होंने एक भविष्यवाणी की जो २५ साल बाद सच साबित हुई।


ग्यारहवीं लोक सभा के गठन के लिए १९९६ में हुए चुनाव में गंगानगर लोकसभा सीट से जनसंघ से बनी भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी निहालचंद जीत कर संसद पहुंचे तो प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले अटल बिहारी
वाजपेयी थे।


पहली यात्रा में शोभायात्रा
वाजपेयी की पहली श्रीगंगानगर यात्रा और भविष्यवाणी के संस्मरण वरिष्ठ अधिवक्ता हुलासमल चोपड़ा आज भी अपनी स्मृतियों में संजोए हुए हैं। चोपड़ा ने बताया कि जनसंघ की राजस्थान प्रांत कमेटी की बैठक में वाजपेयी के आने से कार्यकर्ता काफी उत्साहित थे। तारीख तो अब याद नहीं। लेकिन महीना जनवरी का था। अटल जी का कार्यक्रम एक दिन का था सो उत्साहित कार्यकर्ताओं ने उनकी शोभायात्रा निकाली।


यह शोभायात्रा आजाद टाकिज से शुरू हुई और महावीर दल मंदिर में इसका समापन हुआ। इसी दिन पब्लिक पार्क में सभा हुई, जिसमें सात-आठ हजार लोग जुटे। सभी लोग उनका भाषण सुनने आए थे। वाजपेयी ने तब अपने भाषण के दौरान ही यह भविष्यवाणी की कि जिस दिन आप श्रीगंगानगर से जनसंघ का सांसद दिल्ली भेजोगे, उस दिन सरकार हमारी होगी। चोपड़ा ने बताया कि उनकी इस भविष्यवाणी पर लोगों ने खूब तालियां बजाई। लेकिन इस भविष्यवाणी को सच साबित होने में पच्चीस साल लगे।


ठाकुर के लिए आए
वाजपेयी दूसरी बार १९९३ में श्रीगंगानगर आए। तब मौका था विधानसभा चुनाव का। जनसंघ के जमाने से ही उनके परम सखा रहे भैरोसिंह शेखावत इस चुनाव में श्रीगंगानगर के साथ बाली से किस्मत आजमा रहे थे। श्रीगंगानगर में शेखावत की स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी। तब नेहरू पार्क में जनसभा हुई। वाजपेयी को सुनने के लिए भारी भीड़ जुटी।

तब वे लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता थे। वाजपेयी ने जब अपना भाषण शुरू किया तो भीड़ में सन्नाटा छा गया। यह स्थिति तब तक बनी रही जब तक कि उनका भाषण पूरा नहीं हुआ। अपने भाषण के दौरान वाजपेयी ने भैरोसिंह शेखावत को ठाकुर भैरोसिंह शेखावत संबोधन दिया और इशारों ही इशारों में जनता को यह संदेश दे दिया कि वह ठाकुर के लिए यहां आए हैं।

हालांकि इस चुनाव में भैरोसिंह शेखावत को पराजय मिली। लेकिन बाली में मिली जीत के बाद शेखावत इसी क्षेत्र से निर्दलीय विधायक चुने गए गुरजंट सिंह बराड़, रामप्रताप कासनिया, चौधरी ज्ञानसिंह और शशिदत्ता का समर्थन हासिल कर भाजपा की सरकार बनाने में कामयाब रहे। बराड़ और कासनिया अब भाजपा में हैं।


दिल्ली की किल्ली ढीली
वर्ष १९९३ के विधानसभा चुनाव के दौरान श्रीगंगानगर के अलावा हनुमानगढ़ में भी वाजपेयी की जनसभा हुई। दोनों जनसभाओं में वाजपेयी ने इशारों ही इशारों में पाकिस्तान को चेतावनी दी, वहीं केन्द्र की कांग्रेस सरकार पर भी निशाना साधा। श्रीगंगानगर के वरिष्ठ पत्रकार शिव स्वामी और हनुमानगढ़ भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रेम बंसल ने बताया कि दोनों जनसभाओं में वाजपेयी ने अपने चिरपरिचित अंदाज में ‘दिल्ली की किल्ली ढीली’ होने और उसे कसने के लिए जनता के सहयोग की आवश्यकता बताई तो उपस्थित जनसमूह ने तालियों इसका जवाब दिया। बंसल बताते हैं कि हनुमानगढ़ के बाद रात को वाजपेयी की सरदारशहर में जनसभा थी। हेलीकॉप्टर रात को उड़ान नहीं भर सकता था इसलिए उन्हें सडक़ मार्ग से सरदारशहर तक पहुंचाना तय हुआ। रास्ता लंबा था सो लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता होने के नाते सुरक्षा की मांग की गई तो राज्य सरकार ने देने से इनकार कर दिया। उसके बाद उन्हें कार्यकर्ताओं की सुरक्षा में सरदारशहर भेजा गया।


चल गई रे चल गई
अटल जी की भाषण विधा के सभी कायल रहे हैं। गंभीर मुद्दे पर वक्तव्य देते हुए जब उन्हें लगता कि वातावरण बोझिल हो गया है तो उसमें हास-परिहास का इतनी चतुराई से पुट देते कि सुनने वाले चाह कर भी अपनी हंसी नहीं रोक पाते। यह वाकया १९९३ के विधानसभा चुनाव का है जब वाजपेयी ने श्रीगंगानगर के बाद हनुमानगढ़ में भाजपा प्रत्याशी डॉ.रामप्रताप के समर्थन में जनसभा को सम्बोधित किया। चिल्ड्रन स्कूल के पास हुई जनसभा की याद ताजा करते हुए जल संसाधन मंत्री डॉ. रामप्रताप ने बताया कि भाषण में सांप्रदायिकता की चर्चा करते हुए अटल जी ने लखनऊ का एक किस्सा सुनाया तो जनसभा में जोरदार ठहाका लगा।


किस्सा यूं था कि लखनऊ के बाजार में एक आदमी चल गई, चल गई की आवाज लगाते हुए दौड़े जा रहा था। इस पर लोगों ने अंदाजा लगाया कि सांप्रदायिक दंगा हुआ होगा और पुलिस ने दंगाइयों पर गोली चला दी होगी। बस क्या था पूरे बाजार में अफरा-तफरी मच गई। बाजार बंद हो गया और लोग अपने घरों की ओर दौड़ पड़े। तभी किसी ने उस आदमी को रुकवा कर यह पूछा कि दंगा कहां हुआ है तो उस आदमी ने जवाब दिया दंगा वंगा कुछ नहीं हुआ। मेरी खोटी चवन्नी चल गई तो मैंने खुशी में चल गई...चल गई कहते हुए दौड़ लगा दी कि कहीं बनिया पकड़ कर चवन्नी वापस नहीं कर दे।



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