जयपुर
राजस्थान के सबसे बड़े निगम में भ्रष्टाचार की जो परतें खुल रही है, ये परतें भ्रष्टाचारक की बड़ी अमरबेल का एक हिस्सा भर है। भ्रष्टाचार की स्थिति इस कदर व्याप्त होती जा रही है कि जनता को छोटे से छोटे काम के लिए भी पैसे देने पड़ रहे हैं। भ्रष्टाचार की हालत ये हो चली है कि मेयर साहब भी अपने कारिंदों की कार गुजारी पर कुछ बोल नहीं पा रहे हैं। बात हो रही है जयपुर नगर निगम की। पूरा निगम मुख्यालय गुजरे बीस दिन से एसीबी की नजर में है। यहां से बीस दि में एसीबी ने चार सौ से भी ज्यादा फाइलें बरामद की है। उनके में घोटाले के कई राज छुपे हैं। इनमें से ही कुछ राज बाहर आए हैं। हांलाकि इस पूरे मामले में अभी तक सिर्फ एक एईएन की गिरफ्तार ही हो सकी है। एईएन हिमांशु को छह लाख रुपए कैश के साथ एसीबी गिरफ्तार कर चुकी है और उसे जेल भेजा जा चुका है।
अफसरों को बिना बताए ही करते रहे खरीदारी
एसीबी टीम ने बताया कि निगम में जो खरीद और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर कार्मिक काम कर रहे हैं, उन्होनें गलत तरीकों से खरीदारी की। एसी, टीवी, फ्रीज और अन्य सामान कई गुना ज्यादा दाम में खरीदे। मेंटिनेंस और अन्य कामों के जो रेट्स थे वे भी गलत तरीके से लागू किए। उनको भी कई गुना तक बढ़ा दिया। इनका पूरा साथ वित्तिय शाखाओं से जुड़े उन कार्मिकों ने दिया जिन्होंने ने अफसरों को विश्वास में लिए फाईनेंस और खरीदी की स्वीकृति ले ली। उसके बाद खरीद भी कर डाली। एसीबी अफसरों का कहना है कि फिलहाल एक ही गिरफ्तारी हुई है लेकिन गिरफ्तारी की संख्या बढ़ सकती है। गिरफ्तारी से पहले कई कार्मिकों से पूछताछ हो चुकी है और अन्य कई से पूछताछ हो रही है।
हाई मास्ट लाइट की मरम्मत के नाम पर लाखों का घपला
केंद्र सरकार से मिली 50 हाईमास्ट लाइटों की मरम्मत के नाम पर लाखों रुपए का भ्रष्टाचार सामने आया है। वित्तीय अनियमितताओं का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिन हाईमास्ट लाइटों की कीमत ही 80-80 हजार रुपए थी, निगम के अफसरों और कर्मचारियों ने उन्हें खराब बताकर एक-एक लाख रुपए खर्च कर डाले। वह भी बिना टेंडर और बिना मेंटेनेंस रिपोर्ट के। ये लाइटें दो साल पहले केंद्र सरकार से मिली सहायता के तहत लगाई गई थी। निगम के अफसरों ने एक वर्ष बाद ही सभी लाइटों को खराब बताकर एक-एक लाख रुपए मेंटेनेंस पर खर्च कर डाले। एसीबी के छापे के बाद अब इनकी परतें खुल रही हैं।





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