श्रीगंगानगर। जोहड़ में दुषित पानी से सैंकड़ों मछलियां मौत के मुंह में समा गई है। मामला मिर्जेवाला के निकटवर्ती गांव 9क्यु से जुड़ा है, जहां जोहड़ का दूषित पानी बड़ी तादाद में जिंदा मछलियों को निगल गया। मछलियां मरने के बाद से आसपास का वातावण बदबू मारने लगा है। इसके चलते स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ने लगी है।
दुषित पानी बना खतरा
जानकारी के अनुसार जोहड़ में नई पानी की बारी नहीं डालने के कारण जोहड़ का पानी दूषित होने से मछलियों के मरने का अंदेशा लगाया गया है। अब तक सैकड़ों मछलियां मर गई है। गांव के बच्चों से लेकर बड़े तक जीवित मछलियों को बचाने का हर तरह से जतन कर रहे हैं। इसके लिए पानी से जिंदा मछलियां निकालकर साफ पानी में डाला जा रहा है। लेकिन मरी मछलियों से जो वातावरण दुषित हो रहा है। इसके लिए लोगों की चिंता बढ़ गई है।
सड़ांध से ग्रामीण परेशान
काफी तादाद में मछलियां मरने से जोहड़ का पानी बदबू मारने लगा है। इससे अब स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ने लगी है। इतना ही नहीं मरी मछलियों से उठी सड़ाधं से इलाके में बीमारियों के फैलने का खतरा मंडराने लगा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मछलियों के मरने के बाद बदबू भरे वातावरण में सांस लेना दुभर हो रहा है।
श्वानों का बना भोजन
जोहड़ में मरी मछलियां अब आवारा कुत्तों का भोजन बन रही है। मछलियों को श्वान और अन्य जानवर उठाकर ले जा रहे हैं। इसके चलते आसपास का वातावरण दूषित हो रहा है लेकिन, स्वास्थ्य विभाग भी कोई प्रयास नहीं कर पा रहा।
हादसे को दावत
छोटे-छोटे बच्चे बाल्टी के जरिए जोहड़ से मछलियां निकालने में लगे हैं। लेकिन बच्चों की जिंदगी को लेकर कोई भी गंभीर नहीं है। हाल ही में सवाईमाधोपुर के एक तालाब में डूबने से जयपुर से पिकनिक मनाने गए बच्चों की मौत हो गई थी। जोहड़ के आसपास सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं होने से यहां हमेशा हादसो का डर बना रहता है।





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