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मुशिबत में साथ दिया तो हो गया याराना

ओम टेलर
पाली. दोस्ती का रिश्ता ऐसा होता है जो कई मायनों में खास होता है। यह वह रिश्ता है जो शायद ही किसी के जीवन में ना हो। इस रिश्ते को सेलिब्रेट करने का दिन है फें्रडशिप-डे। जो इस बार रविवार को मनाया जा रहा है। इस फें्रडशिप-डे पर हम आपको को जिले के कुछ दोस्तों की कहानी से रूबरू करवा रहे हैं, जिनकी दोस्ती बरसों से कायम है। दोस्ती के इस रिश्तों को इबादत की तरह मनाने वाले इन लोगों का कहना है विचारों में समानता के चलते ही आज भी इनका रिश्ता बरकरार है। वरना बदलती दुनिया के इस दौरा में रिश्ते मतलबी हो गए हैं। उनके जीवन में भी ऐसे कई पल आए, लेकिन उन्होंने दोस्ती को ही महत्व दिया।
ऐसे हुई फ्रेंडशिप डे मनाने की शुरुआत
अगस्त के पहले सप्ताह के रविवार को फ्रेंडशिप डे के रूप में मनाने का चलन है। प्रथम विश्व युद्ध के बाद लोगों और देशों के बीच काफी शत्रुता बढ़ गई थी। लोग एक-दूसरे से नफरत करते लगे थे। उस समय 1935 में अमेरिकी सरकार ने फ्रेंडशिप-डे की शुरुआत की थी। ३० जुलाई १९५८ को फे्रंडशिप डे मनाने की घोषणा की गई थी।
मुसीबत में दोस्त बनें फिर रिश्तेदार
बात वर्ष २००० की है जब सादड़ी निवासी रवि परमार मेडिकल में डिप्लोमा करने बैंगलूरु गए। जिस परिचत के आश्वासन पर वे बैंगलूरु गए उन्होंने अपेक्षित मदद नहीं की। इतने बड़े शहर में रहने तक का ठिकाना नहीं था। दो-तीन घंटे रवि इधर-उधर घूमते रहे इसके बाद सादड़ी के ही विनोद सोलंकी के बैंगलूरु में रहने की जानकारी मिली तो मदद की उम्मीद में उनके पास पहुंचे। अपने गांव के रवि को देख विनोद ने खुश हुए। उनके साथ कॉलेज गए तथा एडमिशन करवाने में मदद की। डिप्लोमा होने तक खुद के घर में रहने के लिए कहा। विनोद के घर से कॉलेज दूर होने के कारण रवि हॉस्टल में रहने लगे। दो-तीन वर्ष बाद डिप्लोमा कर रवि वापस सादड़ी चले गए, लेकिन निरंतर विनोद के संपर्क में रहे। वर्ष २००५ में रवि ने विनोद की पत्नी संतोष को धर्म बहन बनाया। इस रिश्ते से दोस्ती का रिश्ता और गाढ़ा हो गया। वर्ष २०१३-१४ में रवि के घर के निकट एक भूखण्ड बिक रहा था तो उन्होंने विनोद को इसे खरीदने की बात कही। जिससे दोनों के मकान भी पास-पास हो। विनोद ने फोन पर ही उन्हें भूखण्ड का सौदा करने की स्वीकृति दे दी। व्यापार के कारण विनोद सादड़ी कम ही आ पाते थे। ऐसे में रवि ने अपनी देख-रेख में करीब एक वर्ष की अवधि में उनका पूरा मकान बनवाया। आज स्थिति यह है कि दोनों रिश्तेदार की तरह रहते हैं। दोनों के घर में ऐसा एक भी प्रोग्राम हो दोनों मिलकर जिम्मेदारी निभाते हैं।

 

 



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