अलवर. समय के साथ- साथ महिलाओं की सोच बदलने लगी है। अलवर की महिलाएं अब अपनी ममता दूसरे बच्चों पर लुटा रही हैं। अपने दूध से दूसरों को नया जीवन देने में जी जान से जुटी हैं। मदर मिल्क बैंक की ही देन है कि जनाना अस्पताल में आने वाले किसी भी शिशु को यदि स्वयं की मां का दूध नहीं मिलता है तो उसे बाहर से दूध लाने की जरुरत नहीं पड़ती, मदर मिल्क बैंक से तुरंत दूध मिल जाता है।
ब्रेस्ट फीडिंग की सर्विस भी दी जाती है
जिन माताओं को दूध नहीं आता है उनके शरीर में अनेक प्रकार की बीमारियां पैदा हो जाती है। छाती में गांठ पड़ जाने जैसी परेशानी हो जाती है इसलिए मदर मिल्क बैंक में ब्रेस्ट फीडिंग की सर्विस दी जाती है जिसमें बताया जाता है कि नवजात शिशु को दूध कैसे पिलाएं। कुछ कोशिश के बाद महिलाओं को दूध भी आना शुरु हो जाता है।
2016 में हुई मदर मिल्क बैंक की स्थापना
अलवर के जनाना अस्पताल में 9 सितंबर 2016 को आंचल मदर मिल्क बैंक की स्थापना की गई थी। डेढ़ साल के दौरान करीब 4136 माताओं ने 8692 बार दूध का दान दिया है । दूध दान करने का उत्साह महिलाओं में इतना अधिक है कि अस्पताल से छुटटी मिलने के बाद भी एक दिन में करीब तीन से चार बार वे यहां आकर दूध दान करती हैं। इसके लिए वे न संकोच करती है और न ही किसी प्रकार की घबराहट होती है।
4301 बच्चों को मिला जीवनदान
ऐसे बच्चे जो गोद लिए जाते हैं, जिनकी मां इस दुनिया में नहीं है या फिर मां दूध नहीं पिला पाती हैं। उन शिशुओं के लिए यहां से दूध दिया जाता है। 7 अगस्त तक 4301 शिशुओं को 28773 यूनिट से अधिक दूध दान किया जा चुका है। इतना ही नहीं अलवर में दूध की अधिकता होने पर उसे अजमेर स्थित वितरण केंद्र पर भी भेजा जाता है।
मददगार साबित
अस्पतालों में भर्ती शिशु मृत्यु दर को रोकने और कुपोषण के उन्मूलन में मदर मिल्क बैंक मददगार साबित हो रहा है। महिलाओं की सोच बदल रही है। वे अब दूसरे शिशुओं को दूध पिलाकर ममता लुटा रही है। इस बैंक से अनाथ बच्चों, गोद दिए जाने वाले बच्चों को इससे फायदा हो रहा है। 6300 से ज्यादा माताओं को स्तनपान में सक्षम बनाया गया है।
डॉ. अमनदीप, प्रभारी मदर मिल्क बैंक।





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