अलवर. शहर में कुछ सडक़ें ऐसी हैं जो करीब एक दशक पहले 2007 के आसपास बनी और अभी तक सलामत है जिन पर अच्छी खासी संख्या में वाहन निकलते हैं। दूसरी और पिछले करीब पांच सालों में बनी सडक़ें आए दिन टूट रही है।
बर्फखाना रोड पुरानी : बर्फखाना रोड जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से मॉर्डन मशीनरी तक बनी सडक़ करीब दस साल पुरानी है। हाल में इस सडक़ पर भी सीवरेज व पानी की लाइन डाली गई है।
इसके बावजूद भी पूरी सडक़ साफ सुथरी है। कहीं से टूटी नहीं है। इसी तरह बजाजा बजार में पूर्व चेयरमैन अजय अग्रवाल के समय बनाई गई सडक़ अभी तक नहीं उधड़ी है। जिसकी व्यापारियों में चर्चा भी रहती है। कि करीब दस साल पहले बनाई गई इन सडक़ों में ऐसा क्या मलबा डाला गया जो अभी तक नहीं टूटी है। नई सडक़ एक साल भी नहीं चल पा रही है। हर बारिश में पूरी सडक़ ही बह
जाती हैं।
ये सडक़ हर बारिश में बह रही
शहर में राजर्षि कॉलेज सर्किल से काली मोरी फाटक, रेलवे स्टेशन से काली मोरी पुल तक, पुराना स्टेशन रोड वाली सडक़ें हर बारिश में बह जाती है। महिला थाना के सामने वाली रोड तो कई सालों से गड्ढ़ों में बदल चुकी है। कई बार मरम्मत कर दी। सीवरेज लाइन डालने के बाद पूरी सडक़ ही टूट गई। यही हाल राजर्षि कॉलेज सर्किल से काली मोरी फाटक तक सडक़ का हाल है। यहां बारिश का पानी हर बार सडक़ ही बहा ले जाता है। इस समय भी पूरी सडक़ रोडिय़ों में तब्दील है। रेलवे जंक्शन से काली मोरी पुल की सडक़ की सबसे अधिक दुर्दशा है। कई बार पेचवर्क हो गया। थोड़ी सी बारिश में ही पहले की तरह गड्ढ़े हो जाते हैं।
आप हमसे ही बजाजा बाजार के व्यापारियों से जाकर पूछे कि उनके समय बनाई सडक़ कौनसी है, तुरंत बता देंगे। अब आए दिन सडक़ें टूट रही है। सही मॉनिटरिंग नहीं होने से सडक़ क्षतिग्रस्त हो रही हैं।
अजय अग्रवाल, पूर्व चेयरमैन नगर परिषद अलवर





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