पाली। मेरी जान तिरंगा हैए मेरी शान तिरंगा है, अरमान तिरंगा है, अभिमान तिरंगा है...। देशभक्ति के भाव जगाती इन पंक्तियों का ही असर है कि आजादी के पर्व का जुनून पाली के युवाओं के सिर चढकऱ बोल रहा है। ऐसे जोशीले युवाओं का मस्तक भी इस बार केसरिया बाना ही नहीं, तिरंगा साफा से सुशोभित होगा।
युवाओं के मस्तक को तिरंगा के अभिमान से नवाजने के लिए पाली के एक युवक ने खासतौर पर ऐसे साफे तैयार किए हैं, जिसमें केसरिया के साथ ही सफेद व हरे रंग का भी उपयोग किया है। दरअसल, पाली शहर के जंगीवाड़ा निवासी इमरान अली संजरी ने आजादी के पर्व के लिहाज से तिरंगा साफे तैयार किए हैं, जिसमें सफेद के साथ ही केसरिया व हरे रंग के कपड़े का उपयोग किया है। ये देखने में ही इतने आकर्षक लगते हैं कि युवा इन्हें सिर पर धारण करने को उत्सुक है। वैसे तो माहौल के अनुरूप ही साफें का रंग तय होता है।
अलग-अलग संस्कृति के लिहाज से अलग-अलग जगहों पर शादी-विवाह व अन्य सामाजिक व धार्मिक उत्सवों में गुलाबी व चूंदड़ी के साफे के साथ ही केसरिया साफा भी पहना जाता है, तो कुछ मौकों पर सफेद साफे भी पहने जाते हैं। इमरानी अली की मानें तो आजादी के पर्व पर भी तीन रंगों वाला साफा तैयार किया गया है, जिसकी काफी डिमांड मिल रही है। खास तौर पर विद्यालयों में 15 अगस्त को होने वाले कार्यक्रम में तो लोग इन साफें को पहनने को लेकर काफी उतावले हैं। तिरंगे की शान का ही असर है कि पाली ही नहीं, दूरदराज से भी लोग ऐसे साफे तैयार करवा रहे हैं।
साफे ऐसे कि अंगुली में समा जाए
इमरान अली की मानें तो साफे बांधने की कला इन्हें विरासत में मिली है। पिता हाजी मंजूर अली ने इस कला से दोनों पुत्रों शहादत अली संजरी व इमरान अली को रूबरू करवाया। बड़ा भाई शहादत अली जहां 15 सैकंड में साफा बांधने में माहिर है, तो इमरान अली साफें में नवाचार करता रहता है। इमरान ने कई ऐसे साफे भी तैयार किए हैं, जो हाथों की एक अंगुली में ही समा जाते हैं। महज एक इंच के ये साफे लोग अपनों को उपहार के रूप में देने के साथ ही की-चेन के रूप में भी उपयोग करते हैं।
बैंकॉक में भी फहराया परचम
ये दोनों भाई अपनी कला को बैंकॉक में भी दिखा चुके हैं। मारवाड़ी के साथ ही राठौड़ी, मेवाड़ी, हाड़ौती व अन्य समाज विशेष के साफे बांधने में माहिर दोनों भाइयों ने बैंकॉक में हुई शादी में साफे बांधकर लोगों को अपना मुरीद कर लिया था। इतना ही नहीं, अजमेर में हनुमान जयंती के अवसर पर एक साथ पांच हजार केसरिया साफे बांधे थे।
पत्रिका शिरोधार्य
साफे बांधने में माहिर इमरान अली ने राजस्थान पत्रिका के अखबार से भी एक साफा तैयार किया है, जो देखने में काफी सुंदर बन पड़ा। इमरान का कहना है कि, पत्रिका शुरू से ही शिरोधार्य रहा है। ऐसे में इसे तो जनमानस के सिर पर ही धारण किया जाना चाहिए। इसी मंशा से पत्रिका अखबार से स्पेशल साफा बनाया गया।





No comments:
Post a Comment