झुंझुनूं. टूटी सड़कों पर गडढ़ों में हांफती रोडवेज की बसे यात्रियों को बीच रास्ते में हर दिन धोखा दे रही है। जिले में औसत चार बस प्रतिदिन रास्ते में खराब हो रही है। इससे यात्रियों के परेशान होने के साथ रोडवेज का घाटा भी बढ़ रहा है। यह समस्या छोटे और लम्बे दोनों मार्गों पर है। लम्बे समय से चली आ रही इस समस्या के समाधान को लेकर रोडवेज प्रशासन भी गंभीर नहीं है। समय पर बसों का मेंटिनेंस नहीं हो पा रहा है।
बरसात में सड़के बेहाल
रोडवेज बसों के बीच में खड़ी होने की समस्या को मानसून ने अधिक बढ़ा दिया है। बरसात के कारण हर तरफ सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई है। झुंझुनूं शहर में तो यह समस्या गंभीर स्थिति में हैं। रोडवेज डिपो के पास सड़क पर हर कदम पर गडढ़़े हैं। यह गड्ढ़े कोढ़ में खाज का काम कर रहे हैं। रोडवेज अधिकारियों के अनुसार टूटी सड़को से गुजरने के दौरान सड़कों पर रोडवेज बसों क्षतिग्रस्त होती हैं। इससे बसे जल्दी खराब हो जाती हैं।
लक्ष्य से कम चल रही हैं बसें
ब्रेक डाउन होने के कारण रोडवेज बसों का संचालन लक्ष्य से कम हो पा रहा है। झुंझुनूं आगार का प्रतिदिन ३७ हजार १२९ बस चलाने का लक्ष्य है, लेकिन वर्तमान में बसें ३५ हजार २९० किलोमीटर का ही सफर तय कर पा रही हैं। रोडवेज की बसें तय लक्ष्य से करीब पांच प्रतिशत कम चल रही हैं।
मुख्यालय भी नहीं हैं गंभीर
हर दिन रास्ते में खड़ी होने वाली बसों को लेकर रोडवेज का मुख्यालय भी गंभीर नहीं है। बस के खराब होने के लिए यहां से मुख्यालय को सामान की डिमांड भेजी जाती है, लेकिन समय पर सामान नहीं मिलने के कारण कई दिनों तक बसें सामान के इंतजार में वर्कशॉप में खड़ी रहती है। झुंझुनूं डीपो की ओर से हैड ऑफिस में अभी भी डिमांड के लिए पत्र भेजा हुआ है।
रोज एक लाख के घाटे में रोडवेज डीपो
झुंझुनूं डीपो को रोज करीब एक लाख रुपए का घाटा हो रहा है। घाटे का मुख्य कारण बसों का ब्रेक डाउन होना व बसों का निर्धारित लक्ष्य तय नहीं करना पाना है। झुंझुनूं डीपो की बसों को प्रतिदिन ३७ हजार १२९ किलोमीटर चलने का लक्ष्य मिला है, जबकि बसे ३५ हजार २९० किलोमीटर ही चल रही हैं।
इनका कहना है
झुंझुनूं डिपो की चार बसे औसतन ब्रेक डाउन ले रही है। बसों की मरम्मत के लिए सामान मंगवाने के लिए हैड ऑफिस को पत्र लिखा गया है।
वासुदेव शर्मा, मुख्य प्रबंधक, झुंझुनूं डिपो





No comments:
Post a Comment