सतलुज-व्यास के पानी में ज्यादा केळी आने पर हरिके से घटाना पड़ता है पानी
श्रीगंगानगर.
गंगनहर प्रणाली की दो बड़ी नहरों एफ और एच के शनिवार को केळी से अटने के कारण इनके टूटने की आशंका बन गई। किसानों के इसकी सूचना जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को देने पर नहरों से केळी हटाने का काम शुरू हुआ। सतलुज और व्यास नदियों के पानी के साथ इस समय हरिके हैडवक्र्स पर बड़ी मात्रा में केळी आ रही है। इससे नहरों के टूटने की आशंका के चलते हैडवक्र्स से राजस्थान फीडर और फिरोजपुर फीडर में कई बार पानी घटाना पड़ता है।
एफ और एच नहर में बड़ी मात्रा में केळी आने से पानी का प्रवाह बाधित हो गया। एफ नहर के मिर्जेवाला के पास और एच नहर के दौलतपुरा के पास ओवरफ्लो होकर टूटने की आशंका के चलते किसानों ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को इसकी सूचना दी। इस पर अधिकारी एक्सक्वेटर मशीनों के साथ मौके पर पहुंचे और नहरों में फंसी केळी को हटाने का काम शुरू किया।
गंगनहर के अधीक्षण अभियंता प्रदीप रूस्तगी ने बताया कि सुबह छह बजे के आसपास उन्हें एफ और एच नहर में अत्यधिक मात्रा में केळी आने से नहरों के ओवरफ्लो होकर टूटने की सूचना मिली। इस पर अधिकारियों को मौके पर भेजा गया।
मिर्जेवाला. सुबह आठ बजे तीन जेसीबी की सहायता से कैलियों निकालने का काम शुरू करवाया परंतु तब तक नहर की पटरियों पर सीलन आनी शुरू हो गई थी। इस पर एसई प्रदीप कुमार, एईएन जगदीश डागला, जेईएन सुनील काजला, जेईएन तेजपाल, जल वितरण समिति पृथ्वीराजपुरा के अध्यक्ष राकेश नैण आदि ने मौके पर पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने तुरंत एक बड़ी जेसीबी और मंगवाई। सिंचाई विभाग ने रेलवे की अनुमति से 12 बजे से 2 बजे तक दो जेसीबी भी रेलवे लाइन पर चढ़ा कर नहर से कैलियां निकालने का कार्य शुरू किया।





No comments:
Post a Comment