जालोर. जिला अस्पताल के मेल मेडिकल वार्ड का बैड नम्बर-21 सोमवार को खाली था। मरीज नहीं होने पर वार्ड के कई बैड अक्सर खाली नजर आ जाते हैं, लेकिन आज इस खाली बैड पर सभी की नजर रही।
इस पर भर्ती एक मानसिक रोगी दो दिन पहले रात को कहीं चला गया। इसके बाद से परिजनों ने उसकी तलाश की, लेकिन कहीं पता नहीं चला। थक-हारकर परिजन गांव लौट गए, लेकिन रोगी का अब भी कोई पता नहीं चला। उधर, जिला अस्पताल से गायब हुए इस रोगी के बारे में अस्पताल प्रशासन की लापरवाही भी सामने आ रही है। भर्ती मरीज गायब होने के बाद से अस्पताल प्रशासन की ओर से न तो पुलिस को सूचना दी गई और न ही तलाश हुई। परिजनों ने बताया कि रोगी अपने घर में कई वर्षों से जंजीरों में बंधा हुआ था। उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया गया।
यहां उपचार शुरू होने के बाद उसकी स्थिति में सुधार होने लगा, लेकिन अचानक ही गायब हो गया। मामला जसवंतपुरा ब्लॉक के पूरण गांव निवासी बगदाराम पुत्र देवाराम का है। गत 12 अगस्त की रात वह अस्पताल से कहीं निकल गया था। उधर, अस्पताल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ.एसपी शर्मा से बात करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वार्ड प्रभारी ने इतना ही बताया कि रोगी कहीं चला गया था और वापस नहीं आया।
न शहर में मिला और न घर पहुंचा
नींद खुलने पर पत्नी को बैड खाली दिखा। ढूंढने पर भी कहीं नजर नहीं आया तो वह अस्पताल से बाहर आकर तलाश करने लगी कि शायद चाय पीने के लिए बाहर आ गया हो। यहां पुलिस के गश्ती दल ने उसे देखा तो पूछताछ की, जिस पर महिला ने पुलिस को मामले की जानकारी दी। इसके बाद भी रोगी का कहीं पता नहीं चला। घर चले जाने की उम्मीद में पत्नी भी अगले दिन गांव लौट गई, लेकिन वह घर भी नहीं पहुंचा था।
पत्नी नींद में थी, पति चला गया
जानकारी के अनुसार गत 8 अगस्त को चिकित्सकीय टीम बगदाराम को जिला अस्पताल लेकर आई थी। यहां दो-तीन दिन तक उसका भाई साथ रहा। इसके बाद मरीज की पत्नी सुकीदेवी को उसके पास रखकर वह चला गया। 12 अगस्त की रात को पत्नी उसे चाय पिलाने बाहर ले गई थी। इसके बाद वापस आ गए, लेकिन कुछ समय बाद पत्नी को नींद लग गई तथा मरीज बिना बताए कहीं निकल गया।
फिर भी सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए
परिजनों के मुताबिक दौरा पडऩे पर यह रोगी सामने वाले पर हमला भी कर देता है। दूसरों का बचाव एवं रोगी की सुरक्षा के मद्देनजर परिजन उसे बांध कर रखते थे। कई वर्ष पहले इसका उपचार भी चला था, लेकिन बाद में बंद कर दिया गया। ऐसे में वापस दौरे पडऩे लगे। पिछले कुछ वर्षों से यह घर में जंजीरों से बंधा हुआ था, चिकत्सकीय टीम उसे अस्पताल ले आई, लेकिन ऐसी हालत के बावजूद वार्ड में सुरक्षा या उस पर निगरानी के कोई प्रबंध नहीं किए। गनीमत रही कि उपचार के दौरान इसने किसी पर हमला नहीं किया।
तो ठीक हो सकता है...
उपचार के दौरान उसकी हालत में सुधार हो रहा था, लेकिन बिना बताए अस्पताल से चला गया। वह घर भी नहीं पहुंचा है। तलाश करने के बाद परिजन भी वापस गांव लौट गए। उपचार मिलने पर मरीज ठीक हो सकता है।
- बीएल मावलिया, मानसिक रोग विशेषज्ञ, जालोर अस्पताल





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