कोटा. मेला समिति और नगर निगम प्रशासन 125वें राष्ट्रीय दशहरा मेले को भव्य बनाने की बात कह रहा है, लेकिन निगम बोर्ड को पता नहीं कि दशहरा मेले का स्वरूप कैसा होगा। भव्यता देने के लिए मेला समिति क्या नया कर रही है, दुकानों के आवंटन की क्या नीति तय होगी, यह सब पार्षदों से भी छुपाया जा रहा है।
वरिष्ठ पार्षदों का कहना है कि दशहरा मेले का आयोजन निगम या मेला समिति का नहीं होकर शहर का होता है, इसलिए न केवल निगम बोर्ड की बैठक बुलाकर चर्चा करनी चाहिए, बल्कि प्रबुद्धजनों से भी विचार-विमर्श करना चाहिए। पार्षदों का कहना है कि मेला आयोजन पर चर्चा होगी तो निश्चित रूप से अच्छे सुझाव आएंगे, जिससे मेला आयोजन में चार चांद लग सकेंगे।
पार्षदों ने स्पष्ट कहा कि मेला खत्म होने के बाद यदि बजट के अनुमोदन के लिए बैठक बुलाई तो पारित नहीं करेंगे। इसलिए जल्द ही बोर्ड बैठक बुलाई जानी चाहिए, ताकि दुकानों के आवंटन से लेकर कार्यक्रमों के बारे में चर्चा हो सके।
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बोर्ड में तय होना चाहिए
बोर्ड बैठक में 65 पार्षद एक साथ बैठकर मेला आयोजन पर चर्चा करेंगे तो निश्चित रूप से अच्छे सुझाव आएंगे, जिससे मेले का आयोजन बेहतर हो सकेगा। महापौर और आयुक्त से बोर्ड की बैठक बुलाने के लिए बातचीत कर रहे हैं।
- बृजेश शर्मा, पार्षद
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मिलकर स्वरूप तय हो
125वें मेले को भव्य रूप देना चाहते हैं तो तत्काल बोर्ड बैठक बुलाकर चर्चा करनी चाहिए। बोर्ड तय करे, उस अनुरूप मेले की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाए। जो सुझाव आए, उसकी पालना भी होनी चाहिए, तभी बोर्ड बैठक की सार्थकता रहेगी।
- विवेक राजवंशी, पार्षद
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जरूरी है बोर्ड बैठक
पिछले बोर्ड में मेले से पहले बैठक बुलाकर दुकानों से लेकर कार्यक्रमों पर चर्चा की जाती थी। अब उलटा हो रहा है, मेले में सब कुछ तय करने के बाद बोर्ड बैठक बुलाते हैं, जिसका कोई औचित्य नहीं है। दशहरा मैदान नए सिरे से तैयार हो गया है, इस बार जो व्यवस्था होगी, वह आदर्श गाइडलाइन मानी जाएगी, इसलिए बोर्ड बैठक बुलाएं।
- गोपालराम मण्डा, पार्षद





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