नई दिल्ली। पहली बार राज्यसभा में कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर है। ऐसा इसलिए कि मोदी सरकार ने सर्वसम्मति से उपसभापति के चुनाव को कांग्रेस की ओर से नकारने के बाद से हर हाल में उपसभापति का पद जीतने की योजना तैयार की है। यही कारण है उसने कांग्रेस के खेमे में जा गिरे शिवसेना और बीजेडी को तोड़ लिया है। अगर ऐसा होता है कि कांग्रेस का वर्चस्व राज्य सभा में समाप्त हो जाएगा। यही कारण है कि राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव इस बार पहले से ज्यादा सुर्खियों में है। इसके बावजूद बहुत कम लोग जानते हैं कि यह चुनाव कैसे होता है?
11 बजे से शुरू होगा मतदान
राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव के लिए मतदान कुछ देर बाद आज शुरू हो जाएगा। यह एक संवैधानिक पद है। भारत के संविधान के आर्टिकल 89 में कहा गया है कि यह पद खाली होने के बाद राज्यसभा अपने सांसदों में एक सांसद को उपसभापति पद के लिए चुन सकता है। इस बार एनडीए की ओर से हरिवंश और महागठबंधन की ओर से कांग्रेस के बीके हरिप्रसाद चुनाव मैदान में हैं। सुबह 11 बजे से मतदान होना है। वर्तमान उपसभापति प्रोफेसर पीजे कुरियन का कार्यकाल एक जुलाई को खत्म हो गया था, जिस कारण यह पद अभी खाली है।
क्या है चुनने का नियम
उपसभापति का चुनाव करने की प्रक्रिया बहुत ही सरल है। कोई भी राज्यसभा सांसद इस संवैधानिक पद के लिए अपने किसी साथी सांसद के नाम का प्रस्ताव आगे बढ़ा सकता है। इस प्रस्ताव पर किसी दूसरे सांसद का समर्थन भी जरूरी है। इसके साथ ही प्रस्ताव को आगे बढ़ाने वाले सदस्य को सांसद द्वारा हस्ताक्षरित एक घोषणा प्रस्तुत करनी होती है जिनका नाम वह प्रस्तावित कर रहा है। इसमें इस बात का उल्लेख रहता है कि निवार्चित होने पर वह उपसभापति के रूप में सेवा करने के लिए तैयार हैं। अगर किसी प्रस्ताव में एक से ज्यादा सांसद का नाम हैं तो इस स्थिति में सदन का बहुमत तय करेगा कि कौन राज्यसभा के उपसभापति के लिए चुना जाएगा। अगर सभी राजनीतिक दलों में किसी एक सांसद के नाम को लेकर आम सहमति बन जाती है, तो इस स्थिति में सांसद को सर्वसम्मति से राज्यसभा का उपसभापति चुन लिया जाता है।
अब तक के चुनाव
राज्यसभा उपसभापति पद के लिए अबतक कुल 19 बार चुनाव हुए हैं। इनमें से 14 अवसरों पर सर्वसम्मति से इस पद के लिए उम्मीदवार को चुन लिया गया। 1969 में पहली बार उपसभापति के पद के लिए चुनाव हुआ था। 1992 में भाजपा ने कांग्रेस प्रत्याशी नजमा हेपतुल्ला के विरोध में अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे थे।





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