अलवर जिला मुख्यालय पर स्थित पासपोर्ट कार्यालय में ट्यूबलाइट तक नहीं है। पासपोर्ट बनवाने के लिए यहां खींचने वाले फोटो कम रोशनी में खींचे जाते हैं जिसके चलते कई बार फोटो ही धुंधले आ जाते हैं जिससे लोगों को पासपोर्ट ही दुबारा बनवाना पड़ता है। पासपोर्ट कार्यालय में न बैठने की पर्याप्त जगह है और न ही पंखे।
अलवर में पासपोर्ट कार्यालय मुख्य डाकघर अट्टा मंदिर के पास चल रहा है। इसकी शुरुआत 28 फरवरी 2018 को सांसद डॉ. करण सिंह यादव ने की थी। पासपोर्ट कार्यालय के नाम पर लोगों के जेहन में जयपुर के पासपोर्ट कार्यालय जैसी कल्पना थी। यहां पासपोर्ट कार्यालय में बैठे लोगों को तेज गर्मी के मौसम में उमस का सामना करना पड़ता है। कार्यालय में पर्याप्त पंखे तक नहीं है। हालात इस कदर खराब हैं कि यहां पर्र्याप्त ट्यूबलाइट तक नहीं है जिसके कारण यहां के कर्मचारियों ने अपने स्तर पर एक बल्व लाकर लटका दिया है। इससे यहां कई बार फोटो क्लियर नहीं बन पाते हैं। इसका खामियाजा उन लोगों को होता हैं जिनके पासपोर्ट में ही यह खराब फोटो लगकर आ जाता है। ऐसे में इन्हें दुबारा पासपोर्ट बनवाना पड़ता है जिसका प्रक्रिया दुबारा से होती है।
रोज बनते 60 पासपोर्ट
अलवर जिला मुख्यालय पर अब तक 4500 पासपोर्ट बन चुके हैं। यहां प्रतिदिन 60 पासपोर्ट बनते हैं। पासपोर्ट के लिए प्रार्थना पत्र ऑनलाइन लिया जाता है जिसकी वेटिंग 4 या 5 दिन की चल रही है।
यूपीएस तक नहीं, डाक विभाग नहीं कर रहा सहयोग
विदेश मंत्रालय की ओर से अलवर जिला मुख्यालय पर बनने वाले पासपोर्ट की प्रक्रिया को यहीं पूरा करने के लिए यहां ग्रोटिंग आफिसर की नियुक्ति होनी है। इसके लिए स्केनर व अन्य उपकरण आ गए हंै, लेकिन यहां यूपीएस नहीं लगाया गया है जो कई दिनों से यहां आया हुआ है। पासपोर्ट कार्यालय का थ्री फेज कनेक्शन तक नहीं हुआ है। पासपोर्ट कार्यालय में फर्नीचर तक पुराना है और ना ही लोगों के बैठने की पर्याप्त सुविधा है। इस कार्यालय में सुरक्षा गार्ड तक नहीं है। इस कार्यालय में लोगों के लिए पेयजल तक की व्यवस्था नहीं है। विदेश मंत्रालय ने कई बार डाक विभाग को इसके लिए पत्र लिखा है लेकिन यहां सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।





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