धीरेंद्र जोशी/ उदयपुर. स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय तो बना दिए गए, लेकिन जागरुकता की कमी के चलते लोग खुले में शौच कर रहे हैं। खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) करने के लिए स्वच्छाग्रही और अन्य कार्यकर्ता लोगों को जागरूक करेंगे। लोगों को विभिन्न संस्थाओं की सर्वे रिपोर्ट बताकर इसके आर्थिक और स्वास्थ्य पर पडऩे वाले सकारात्मक प्रभाव बताए जाएंगे।
यह बात स्वच्छ भारत मिशन के तहत ओडीएफ की निरंतरता बनाए रखने को लेकर राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान पत्रकारों से रूबरू होते हुए केन्द्रीय पेयजल एवं स्वच्छता सचिव परमेश्वरन अय्यर ने कही। उन्होंने कहा कि पहले स्वच्छता दूत कहे जाने वाले कार्यकर्ताओं को प्रधानमंत्री ने स्वच्छाग्रही नाम दिया। इनके प्रयासों के फलस्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय निर्माण एवं उसके निरंतर उपयोग को लेकर जागरुकता में वृद्धि हुई है। इससे ओडीएफ का दायरा 39 प्रतिशत से बढ़कर 91 प्रतिशत हो गया है। ओडीएफ में निरंतरता बनाए रखने के लिए जमीनी स्तर पर स्वच्छाग्रहियों की नियुक्ति एवं उनका नेटवर्क मजबूत किया जाएगा।
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बनाई पाइप-लाइन से पानी पहुंचाने की नीति
शौचालयों में पानी की समस्या के सवाल पर अय्यर ने कहा कि ओडीएफ घोषित हो चुके गांवों तक पाइप-लाइन से पानी की सप्लाई प्राथमिकता से पहुंचाने की नीति बनाई गई है। साथ ही शौचालय निर्माण की ऐसी तकनीक काम में ली जा रही है जिससे बहुत ही कम मात्रा में पानी से शौचालय का उपयोग किया जा सकता है।
यह हैंं फायदे
अय्यर ने बताया कि डब्ल्यूएचओ ने पाया कि स्वच्छ भारत मिशन जब पूरा होगा तो करीब तीन लाख बच्चों की जिंदगी बचेगी। महिलाओं को भी खुले में नहीं जाना पड़ेगा। कुपोषण सहित अन्य बीमारियां नहीं होंगी। यूनिसेफ ने पाया कि एक ओडीएफ गांव में एक परिवार को सालाना 50 हजार की बचत होती है। जब लोग यह समझ जाएंगे कि इसमें आर्थिक लाभ है तो वे इसका उपयोग करना शुरू कर देंगे।
2 अक्टूबर तक देश होगा ओडीएफ
अय्यर ने कहा कि प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती 2 अक्टूबर, 2019 तक देश को खुले में शौच से मुक्त करने का लक्ष्य सामने रखा था जिसे हम तय समय से पहले ही प्राप्त कर लेंगे। उन्होंने कहा कि अभी तक 19 राज्य एवं केन्द्र शासित प्रदेश खुले में शौच से मुक्त घोषित किए जा चुके हैं। आगामी 2 अक्टूबर तक यह संख्या 26 तक पहुंच जाएगी। देश के 435 जिले एवं 4 लाख 24 हजार गांव ओडीएफ घोषित किए जा चुके हैं।





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