नई दिल्ली। आयरलैंड हॉकी टीम का पहला महिला हॉकी वर्ल्ड कप जीतने का सपना रविवार को नीदरलैंड्स के खिलाफ फाइनल मुकाबले में 6-0 से हारकर टूट गया। नीदरलैंड्स की टीम ने आठवीं बार वर्ल्ड कप पर कब्जा जमाया। नीदरलैंड्स की टीम पूरे मैच में आयरलैंड पर भारी रही, आयरलैंड की डिफेन्स को भेदते हुए नीदरलैंड्स के छः अलग-अलग खिलाड़ियों ने गोल दागे। इसके साथ ही नीदरलैंड्स की टीम की यह सभी प्रतिस्पर्धाओं में लगातार 32वीं जीत थी। नीदरलैंड्स की किटी वैन मेल ने टूर्नामेंट में सर्वाधिक 8 गोल दागे।
डॉक्टरों-वकीलों ने रचा इतिहास-
आयरलैंड की टीम वर्ल्ड कप में क्वालीफाई करने वाली 16 टीमों में 15वें रैंक पर थी। इस टीम में पेशेवर खिलाड़ियों के बजाए डॉक्टर, वकील और अन्य पेशों में लिप्त खिलाड़ियां थी। इन खिलाड़ियों को टीम की फंडिंग के लिए हर साल 43,800 रुपए अपनी जेब से भरने होते थे। इसके बाद भी इस टीम ने गजब का खेल दिखत हुए फाइनल में जगह बनाई और नंबर-1 टीम से हारी। उन्होंने अपने क्वार्टर फाइनल मुकाबले म,इ भारतीय हॉकी टीम को मात दी और सेमी फाइनल मुकाबले में स्पेन को हराया।
इन देशों ने जीते गोल, सिल्वर और ब्रॉन्ज-
हॉकी वर्ल्ड चैंपियनशिप का गोल्ड मेडल नीदरलैंड्स के नाम जिन्होंने आयरलैंड को फाइनल मुकाबले में 6-0 से हराया। यह नीदरलैंड्स का आठवां वर्ल्ड कप गोल्ड था। सिल्वर 15वीं रैंक वाली आयरलैंड के नाम रहा जिनको नीदरलैंड्स ने फाइनल मुकाबले में हराया। ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में स्पेन की टीम ने ऑस्ट्रेलिया को हरा कर तीसरे स्थान पर कब्जा जमाया।
भारत का प्रदर्शन-
भारत के ग्रुप में इंग्लैंड, अमरीका और आयरलैंड की टीमें थीं। भारतीय टीम को आयरलैंड के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। वहीं उसने अमरीका और इंग्लैंड के खिलाफ मैच ड्रा खेले थे। इसके बाद प्लेऑफ में भारत का मुकाबला इटली से हुआ जिसमे भारत ने जीत हासिल की। प्लेऑफ के बाद क्वार्टर फाइनल मुकाबले में एक बार फिर उसका सामना आयरलैंड से हुआ जहां उसे हार का सामना करना पड़ा। इस हार से भारतीय टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई। भारतीय टीम आठवें स्थान पर रही।





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