अमरसिंह राव
मैं सिरोही हूं। यानी देवनगरी। मेरी दहलीज पर आने वाली सीएम वसुंधरा राजे के स्वागत को तैयार हूं। आप जब तब आईं, बारिश साथ लेकर आईं। पहाडिय़ों को हरा-भरा कर गईं। इस बार भी मौसम का मिजाज ठीक वैसा ही है। इसलिए आपसे उम्मीदें भी खासी हैं। उम्मीदें इसलिए कि वह आपके रहते पूरी हों। आपने पिछली यात्रा के दौरान ‘नर्मदा का नीर’ लाने का वादा किया लेकिन मलाल सिर्फ इतना रहा कि उस पर ध्यान नहीं दिया। गुजरात से सटा होने और माउंट सरीखा पर्यटन स्थल होने के बावजूद हवाई मार्ग से जोडऩे के प्रयास भी गति नहीं पकड़ पाए। जनता को उदयपुर, जोधपुर या अहमदाबाद से हवाई सेवा लेनी पड़ती है। हवाई यात्रा तो छोड़ो, सबसे बड़ी हैरानी तो यह है कि सिरोही जिला मुख्यालय होने के बावजूद रेल मार्ग तक से नहीं जुड़ पाया है। रेल से यात्रा करने के लिए भी जनता को पिण्डवाड़ा या आबूरोड जाना पड़ता है। टीस यह भी कि जिले का सबसे बड़ा शहर आबूरोड तक उपखण्ड मुख्यालय से नहीं जुड़ पाया है। यह वह आबूरोड शहर है जो आबादी और क्षेत्रफल दोनों ही लिहाज से सिरोही से तकरीबन दुगुना बड़ा कह सकते हैं।
दर्द इस बात का भी है कि बत्तीसा नाला परियोजना के लिए 213 करोड़ रुपए मंजूर किए पर काम अब तक गति नहीं पकड़ पाया है। सब कुछ है पर सिरोही की जनता पर्याप्त पेयजल के लिए बाट जोह रही है। पिछले वर्ष अतिवृष्टि के बाद आप शहर में आईं। लोगों का दर्द साझा किया। फोरलेन पर जिले के वाहनों से बिना टनल का उपयोग टोल वसूली की पीड़ा सुनी। आपने कुछ व्यवस्था करने की बात भी कही पर जनता को इससे मुक्ति नहीं मिल पाई। शिक्षा के क्षेत्र में सिरोही बहुत पिछड़ा है। विधि महाविद्यालय खुल गया पर व्याख्याता नहीं हैं। यही हाल पीजी और अन्य महाविद्यालयों के हैं। यहां जिला अस्पताल में उपकरण और चिकित्सक तो हैं लेकिन गंभीर मरीजों को अधिकांश मामलों में उदयपुर रैफर कर दिया जाता है। आजकल जनता इसे रैफर अस्पताल के नाम से जानने तक लग गई है। रोज कई गाडिय़ां मरीजों को इलाज के लिए गुजरात ले जाती हैं।
मैं जेहन में न सिर्फ प्रदेश का सबसे ऊंचा गुरु शिखर समेटे हूं बल्कि पेड़-पौधे और भांत-भांत की औषधीय वनस्पतियां तक संभाले हुए हूं। मेरी गोदी में विश्व विख्यात देलवाड़ा का जैन मंदिर, अधर देवी, सारणेश्वर महादेव मंदिर, पावापुरी, जीरावला पाश्र्वनाथ और भैरुतारक सरीखे धाम हैं। तो पहाड़ी पर नक्की सरीखी नामी झील भी है। आपसे उम्मीद सिर्फ इतनी है कि जो कुछ काम अधूरे रह गए हैं उन्हें न सिर्फ पूरा करने की हुंकार भर जाओ बल्कि उसकी ऐसी मॉनिटरिंग रखो कि वह समय पर पूर्ण हो जाएं। जिस गति से काम आपके आगमन पर हुए हैं वैसे ही कार्य भविष्य में भी हों। बस इसके पुख्ता बन्दोबस्त कर जाओ।
-देवनगरीड्डकुछ नजरें इनायत इधर भी कीजिए
अमरसिंह राव
मैं सिरोही हूं। यानी देवनगरी। मेरी दहलीज पर आने वाली सीएम वसुंधरा राजे के स्वागत को तैयार हूं। आप जब तब आईं, बारिश साथ लेकर आईं। पहाडिय़ों को हरा-भरा कर गईं। इस बार भी मौसम का मिजाज ठीक वैसा ही है। इसलिए आपसे उम्मीदें भी खासी हैं। उम्मीदें इसलिए कि वह आपके रहते पूरी हों। आपने पिछली यात्रा के दौरान ‘नर्मदा का नीर’ लाने का वादा किया लेकिन मलाल सिर्फ इतना रहा कि उस पर ध्यान नहीं दिया। गुजरात से सटा होने और माउंट सरीखा पर्यटन स्थल होने के बावजूद हवाई मार्ग से जोडऩे के प्रयास भी गति नहीं पकड़ पाए। जनता को उदयपुर, जोधपुर या अहमदाबाद से हवाई सेवा लेनी पड़ती है। हवाई यात्रा तो छोड़ो, सबसे बड़ी हैरानी तो यह है कि सिरोही जिला मुख्यालय होने के बावजूद रेल मार्ग तक से नहीं जुड़ पाया है। रेल से यात्रा करने के लिए भी जनता को पिण्डवाड़ा या आबूरोड जाना पड़ता है। टीस यह भी कि जिले का सबसे बड़ा शहर आबूरोड तक उपखण्ड मुख्यालय से नहीं जुड़ पाया है। यह वह आबूरोड शहर है जो आबादी और क्षेत्रफल दोनों ही लिहाज से सिरोही से तकरीबन दुगुना बड़ा कह सकते हैं।
दर्द इस बात का भी है कि बत्तीसा नाला परियोजना के लिए 213 करोड़ रुपए मंजूर किए पर काम अब तक गति नहीं पकड़ पाया है। सब कुछ है पर सिरोही की जनता पर्याप्त पेयजल के लिए बाट जोह रही है। पिछले वर्ष अतिवृष्टि के बाद आप शहर में आईं। लोगों का दर्द साझा किया। फोरलेन पर जिले के वाहनों से बिना टनल का उपयोग टोल वसूली की पीड़ा सुनी। आपने कुछ व्यवस्था करने की बात भी कही पर जनता को इससे मुक्ति नहीं मिल पाई। शिक्षा के क्षेत्र में सिरोही बहुत पिछड़ा है। विधि महाविद्यालय खुल गया पर व्याख्याता नहीं हैं। यही हाल पीजी और अन्य महाविद्यालयों के हैं। यहां जिला अस्पताल में उपकरण और चिकित्सक तो हैं लेकिन गंभीर मरीजों को अधिकांश मामलों में उदयपुर रैफर कर दिया जाता है। आजकल जनता इसे रैफर अस्पताल के नाम से जानने तक लग गई है। रोज कई गाडिय़ां मरीजों को इलाज के लिए गुजरात ले जाती हैं।
मैं जेहन में न सिर्फ प्रदेश का सबसे ऊंचा गुरु शिखर समेटे हूं बल्कि पेड़-पौधे और भांत-भांत की औषधीय वनस्पतियां तक संभाले हुए हूं। मेरी गोदी में विश्व विख्यात देलवाड़ा का जैन मंदिर, अधर देवी, सारणेश्वर महादेव मंदिर, पावापुरी, जीरावला पाश्र्वनाथ और भैरुतारक सरीखे धाम हैं। तो पहाड़ी पर नक्की सरीखी नामी झील भी है। आपसे उम्मीद सिर्फ इतनी है कि जो कुछ काम अधूरे रह गए हैं उन्हें न सिर्फ पूरा करने की हुंकार भर जाओ बल्कि उसकी ऐसी मॉनिटरिंग रखो कि वह समय पर पूर्ण हो जाएं। जिस गति से काम आपके आगमन पर हुए हैं वैसे ही कार्य भविष्य में भी हों। बस इसके पुख्ता बन्दोबस्त कर जाओ।
-देवनगरीड्ड





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