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प्रीमियम पूरा, बीमा अधूरा, अब भटक रहे किसान

 

केस-एक : बारां के सहरोद नरसिंहपुरा निवासी भागीरथ शर्मा का 28 बीघा जमीन पर एसबीआई बारां शाखा से केसीसी है। बैंक ने अगस्त 2017 में 4.51 हैक्टेयर में फसल बीमा के लिए 2301 रुपए प्रीमियम काटा। खेत में बोए सोयाबीन, उड़द बरसात से चौपट हो गए। कृषि विभाग ने पूरा खराबा मानकर बीमा कंपनी को क्लेम के लिए पत्र लिखा। बीमा कम्पनी ने उस बताया कि बैंक से 0.4 हैक्टेयर का ही बीमा प्रीमियम 216 रुपए मिला है। किसान ने बैंक व बीमा कम्पनी के खिलाफ बारां कोतवाली थाने में पिछले दिनों रिपोर्ट करा दी।

केस-दो : सहरोद नरसिंहपुरा के ही हरिबल्लभ के पास भी एसबीआई बारां शाखा में 25 बीघा की केसीसी है। बैंक 4 हैक्टेयर का खरीफ फसल का 2301 रुपए बीमा प्रीमियम काटा। सोयाबीन, उड़द बरसात में चौपट हो गए। कृषि विभाग ने बीमा कम्पनी को क्लेम के निर्देश दिए तो कम्पनी ने बताया कि बैंक ने 0.8 हैक्टेयर का ही बीमा किया, प्रीमियम के 432 रुपए रुपए भेजे। उसने बैंक व बीमा कम्पनी के खिलाफ बारां कोतवाली थाने में पिछले दिनों रिपोर्ट करवा दी।


कोटा. ऐसे 11 किसान और हैं, जिनके साथ बैंक व फसली बीमा कम्पनी के स्तर पर ऐसी गड़बड़ी के शिकार हो गए। किसानों ने बैंक व बीमा कम्पनी को पार्टी बनाते हुए एफआईआर दर्ज कराई। हाड़ौतीभर में ऐसे कई मामले हैं, जिसमें बैंकों ने केसीसी धारक किसानों से प्रीमियम राशि तो पूरी वसूली, लेकिन बीमा कम्पनियों में नाम मात्र की ही राशि जमा कराई। वहीं बीमा कम्पनियों ने भी किसानों को अभी तक भी फसल खराबे का क्लेम नहीं दिया। आज भी पीडि़त किसान क्लेम के लिए कभी बैंक तो कभी बीमा कम्पनी के चक्कर काट रहे हैं।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की गाइड लाइन के अनुसार, प्राकृतिक आपदा से फसल नष्ट होने पर कृषि, राजस्व व बीमा कम्पनी के प्रतिनिधियों को संयुक्त रूप से खराबे की दस दिन में रिपोर्ट तैयार कर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के पोर्टल पर अपलोड करनी होती है। रिपोर्ट तैयार होने के 15 दिन की अवधि में किसान को क्लेम भुगतान करना होता है।

ऐसे हुई गड़बड़ी: अलग-अलग रुट से जमा हुआ प्रीमियम

बारां कोतवाली में किसानों द्वारा दर्ज एफआईआर पर पुलिस ने अनुसंधान शुरू किया, तो सामने आया कि बैंक ने पहले तो बीमा योजना के पोर्टल पर किसानों की जानकारी अपलोड कर प्रीमियम बीमा कम्पनी में जमा कराया, लेकिन पोर्टल का सर्वर धीमा चलने के कारण पूरा प्रीमियम बीमा कम्पनी में जमा नहीं हो पाया। बीमा कम्पनी ने बैंक को पूरा प्रीमियम जमा नहीं होने के बारे में अवगत कराया तो बाद में बैंक ने एनईएफटी (नेशनल इलेक्टॉनिक फंड ट्रांसफर) कर प्रीमियम सीधा कम्पनी को जमा करा दिया। ऐसे में जिन किसानों का प्रीमियम सीधा एनईएफटी से जमा हुआ है, उनका रिकॉर्ड योजना के पोर्टल पर नहीं मिला, तो बीमा कम्पनी ने भी प्रीमियम जमा हुआ नहीं माना।

बैंक ने किसानों से फसल बीमा का जितना प्रीमियम लिया, सारा बीमा कम्पनी में जमा कराया। हमारे पास किसान के फसल प्रीमियम का एक रुपया भी नहीं है। फसल खराबे पर पीडि़त किसानों को क्लेम देना बीमा कम्पनी का मामला है।
आलोक पटनायक, रीजनल मैनेजर, (ऋण) एसबीआइ

 



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