उदयपुर. शहर में महाकाल नगर भ्रमण पर की सवारी निकली गई, जिसमे नृत्य मुद्रा में गणपति ने शाही सवारी की अगवाई की, भगवान महाकाल की इस पारंपरिक शाही सवारी में इस बार कई चित्ताकर्षक झांकियां शामिल हुई। सवारी की अगवाई नृत्य मुद्रा में डमरू और शंखनाद करते प्रथम पूज्य भगवान गजानन ने की। इसके साथ ही शिव परिवार भी इस बार विशेष आकर्षण रहे। मुख्य संयोजक रमाकांत अजारिया ने बताया कि शाही सवारी में ओगड़ी माई की धुणी की झांकी भी शामिल हुई। आयोजन समिति के अध्यक्ष सुनील भट्ट ने बताया कि शाही सवारी में मुंबई महाराष्ट्र से विशेष गणपति ढोल भी शामिल थे। 51 कलाकार महाराष्ट्र की पारंपरिक वेशभूषा में ढोल बजाकर शाही सवारी में शामिल थी। शाही सवारी मे 55 झांकियां मंदिर की ओर से निकाली।
सचिव चन्द्रशेखर दाधीच ने बताया कि सुबह पूजा अर्चना के बाद अभिजित मूर्हूत में 12.15 बजे निर्माणधीन गुफा से महाकाल की सवारी मंदिर के पूर्वी द्वार से होते हुए निकली। जो शहर के विभिन्न मागों से होते हुए पुन: महाकाल मंदिर पहुंची । दाधीच ने बताया कि हाथीपोल जगदीश चौक और अम्बामाता मंदिर में पूजा-अर्चना हुई। उन्होने बताया कि इस दौरान केवल पुजारी परिषद के सदस्य ने ही पूजा की। शाही सवारी में शिव विग्रह पर रास्ते में प्रन्यास द्वारा और विभिन्न समाज, संगठनों द्वारा पुष्प वर्षा की गई। इस दौरान बारिश में भीगते हुए महाकाल के भक्तों ने भोले को नगर भ्रमण कराया । पूरे रास्ते बारिश में भक्त झूमते हुए चल रहे थे। यह रहेगा मार्ग सचिव सीएस दाधीच ने बताया कि शाही सवारी महाकालेश्वर मंदिर के पूर्वी द्वार से रवाना होकर स्वरूप सागर काला किवाड़, शिक्षा भवन चौराहा, चेटक, हाथीपोल, हरवेनजी का खुरा, घंटाघर, जगदीश चौक, घडिय़ा देवरा, चांदपोल पुलिया, जाड़ा गणेशजी, अंबामाता मंदिर, राड़ाजी चौराहा होते हुए पुन: शाम 7 बजे मंदिर पहुंचेगी । यहां महाआरती के साथ ही प्रभु विश्राम करेंगे।





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