अलवर जिले के राजकीय महाविद्यालयों के विद्यार्थियों में इस वर्ष छात्रसंघ चुनावों को लेकर कोई उत्साह नहीं है। छात्र संगठन अपने स्तर पर चुनाव की रणनीति तैयार करने में जरूर लग रहे हैं। महाविद्यालयों में ना ही प्रत्याशी सामने आ रहे हैं, ना ही कोई चुनावी प्रचार हो रहा है। राजर्षि महाविद्यालय में नया सत्र शुरु होते ही चुनावी हवा शुरु हो जाती है, लेकिन इस वर्ष राजर्षि महाविद्यालय में भी सूनापन छाया हुआ है। गौरी देवी महाविद्यालय में भी अभी किसी ने दावेदारी पेश नहीं की है। कला महाविद्यालय चुनावी हुड़दंग के लिए मशहूर है, लेकिन यहां भी कोई खास चहल-पहल नजर नहीं आ रही। पिछले वर्ष जहां चुनावों से दो माह पूर्व ही सोशल मीडिया पर सैकड़ों चुनावी पोस्ट दिख जाते थे, लेकिन इस बार सोशल मीडिया के माध्यम से भी चुनावी प्रचार नहीं किया जा रहा है। पिछले वर्ष प्रत्याशियों को जिताने में सोशल मीडिया ने अहम भूमिका निभाई थी।
प्रवेश प्रक्रिया ही पूरी नहीं :
सरकारी महाविद्यालयों में इस वर्ष प्रवेश प्रक्रिया ही पूरी नहीं हो पाई है। इसके कारण दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को सेक्शन भी आवंटित नहीं किए गए हैं। प्रवेश प्रक्रिया समाप्त होने में अभी एक हफ्ते का समय और लग सकता है।
विद्यार्थियों का के्रज घटा :
छात्रसंघ चुनावों को लेकर विद्यार्थियों में अब के्रज घटने लगा है। अब विद्यार्थी छात्रसंघ चुनावों में कम रुचि लेने लगे हैं। इस संदर्भ में आटर्स कॉलेज के संयुक्त सचिव जितेन्द्र कौशिक का कहना है कि पिछले वर्ष चुनावी प्रचार में प्रथम वर्ष के कई विद्यार्थी जुटे थे, लेकिन इस वर्ष विद्यार्थी चुनावों की ओर अधिक ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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विधि महाविद्यालय का प्रवेश शुल्क निर्धारित
अलवर. राजकीय विधि महाविद्यालय ने विधि कक्षा के पार्ट प्रथम व द्वितीय के नियमित विद्यार्थियों का प्रवेश शुल्क निर्धारित किया है। सामान्य वर्ग के लिए 1806, आयकर दाता को 1926, सामान्य वर्ग छात्राओं के लिए 1716, एसटी/एससी व ओबीसी छात्र का 1575 व एसटी/एससी व ओबीसी छात्राओं के लिए 1605 शुल्क निर्धारित किया है।





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