श्रीगंगानगर।
नगर विकास न्यास की ओर से धक्के से तोड़ी गई नई धान मंडी की दीवार के भुगतान का अभी तक कोई अता-पता नहीं है। उसने मंडी की दीवार साइड वाले दुकानदारों पर संशय की तलवार भी लटका रखी है। इस बारे में दुकानदार संबंधित अधिकारियों से कई बार गुहार कर चुके लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।
जस्सासिंह रामगढिय़ा मार्ग वाली साइड की इस तोड़ी गई दीवार की राज्य सरकार को लगभग सवा साल बाद याद आई थी, तब उसने उच्चस्तरीय बैठक रखी तो इसमें प्रथम दृष्टया माना गया है कि न्यास ने 'धक्काशाही' की। नोटिस में लिखा गया कि 6 जून, 2016 को बिना किसी विधिक कार्यवाही के मंडी समिति के स्वामित्व की भूमि पर निर्मित चारदीवारी को न्यास ने ध्वस्त किया।
जयपुर में प्रमुख शासन सचिव (कृषि) की अध्यक्षता में इसके बाद फिर बैठक हुई, इसमें जिला कलक्टर, कृषि विपणन विभाग के निदेशक, न्यास के सचिव एवं मंडी समिति के सचिव को बुलाया गया। इस बैठक में न्यास को मंडी समिति को ध्वस्त दीवार का मुआवजा देने के निर्देश दिए गए लेकिन एक साल से अधिक हो गया अभी तक मुआवजा राशि नहीं दी गई है।
उल्लेखनीय है कि यूआईटी ने मंडी की मुरब्बा लाइन से 60 फीट जगह को एक तरह से अतिक्रमण मानते हुए हटाने का कहा था। इस पूरी जगह को लिया जाता है तो मंडी के थर्ड ब्लॉक की दुकान नम्बर 227 से 272 तक के गोदाम करीब 15 फीट टूटेंगे, जबकि गोदाम और दुकान का स्वामित्व दुकानदारों का है। मंडी समिति ने बकायदा राशि लेकर रजिस्ट्री करवा रखी है।
मंडी परिसर में गेट नम्बर 4 के पास पेट्रोल पम्प के लिए भी भूमि चिन्हित की हुई है, यह जमीन एवं मंडी के ऑक्सीडेशन पौण्ड, पम्प रूप की भूमि भी न्यास के दावे के हिसाब से जाती है। इस जगह आवंटित पेट्रोल पम्प का मामला अलग से चल रहा है। मंडी के चार नम्बर गेट का लोकार्पण 25 अप्रेल 2011 को तत्कालीन कृषि विपणन राज्य मंत्री गुरमीत सिंह कुन्नर ने किया था। मंडी की ध्वस्त की गई दीवार की जगह अस्थाई ताराबंदी करवाई गई है, कुछ मलबा नाले में एवं आस-पास अभी तक बिखरा हुआ है। इस रास्ते से चोरी की आशंका रहती है, बेसहारा गौवंश भी मंडी के अंदर आते हैं।





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