मो. इलियास/उदयपुर. साहब, बलात्कार के दोनों आरोपियों को हमने पकड़ते हुए उनकी पूरे गांव में रैली निकाली। कई ग्रामीणों ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाया। पुलिस को आरोपितों को सुपुर्द कर लिखित रिपोर्ट में भी दी। वीडियो दिखाया तो पुलिस ने धमकाते हुए डिलीट करवा दिया। बाद में कार्रवाई के लिए थानाधिकारी महिपालसिंह व कांस्टेबल मणिलाल गांव में आए और कार्रवाई की एवज में पैसों के अलावा मुर्गा व शराब मांगी। शराब तो नहीं दी लेकिन बड़ा मुर्गा अपने साथ ले गए। दोनों को कार्रवाई की एवज में अब तक 5200 रुपए भी दिए। 12 हजार रुपए अलग से मांगे तब इसकी शिकायत एसपी को देते हुए परिवाद पेश किया था।
यह कहना था बलात्कार पीडि़ताओं के परिजनों का। शुक्रवार को परिजनों व ग्रामीणों ने पुलिस की कारगुजारियां उजागर करने के साथ ही राजस्थान पत्रिका को वीडियो भी उपलब्ध करवाया। वीडियो में दोनों आरोपियों को रस्सी से बांधकर करीब सौ ग्रामीण जुलूस निकालते हुए थाने ले जा रहे हैं। एक पुलिसकर्मी से बातचीत भी सामने आई है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने जिस दिन दोनों आरोपितों की फरारी बताई। वे उसी दिन शाम को गांव पहुंचे, पहाड़ी पर बैठकर शराब पीते हुए उन्हें धमकियां दी। गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने शुक्रवार के अंक में ‘बलात्कार में तोड़बट्टा, अवैध हिरासत से भागे आरोपी’ खबर प्रकाशित कर पुलिस की लापरवाही की पोल खोली थी।
बलात्कार की घटना के बाद ग्रामीणों ने आरोपी दिलीप पुत्र खन्नी उर्फ राजू दामा व राकेश पुत्र बाबूलाल दामा को पुलिस सुपुर्द किया था। पुलिस ने गिरफ्तारी के बजाए उन्हें छोड़ दिया। इस संबंध में शुक्रवार को सीओ झाड़ोल ओमप्रकाश चौधरी ने भी ग्रामीणों से बयान लिए। यह खुलासा दिनभर पुलिस महकमे चर्चा में रहा। इधर, फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए एसपी के आदेश पर टीम ने दबिशें दी लेकिन अभी उनका पता नहीं चला।
छोटा मुर्गा था उसे छुड़वा दिया
परिजनों ने बताया कि थानाधिकारी महिपाल सिंह व मणिलाल जब कार्रवाई के लिए गांव आए तो उन्होंने आते ही कहा कि हमको दाल-बाटी खानी है। बाद में मुर्गा मांगा। जब मुर्गा लाए तो उसे छोटा कहकर छुड़वा दिया बाद में बड़ा मुर्गा लाए तो वे उसे साथ ले गए। दारू की मांग की तो उन्हें मना किया। इस पर कांस्टेबल मणिलाल बोला कि दारू नहीं पिलाओगे तो यह मेरा बेल्ट है जो टूट जाएगा तुमको मारते-मारते। परिजनों ने एक आरोपी को नाबालिग बताने के लिए पुलिस की ओर से रिकॉर्ड में काट-छांट करने का आरोप भी लगाया।
डेढ़ किमी पैदल लेकर गए थे आरोपी को
ग्रामीणों ने बताया कि घटना के दौरान जाग होने से उन्हें बंद कर दिया था। अगले दिन सुबह गांव वाले बांधकर जुलूस के साथ पैदल ही करीब डेढ़ किमी.पहाड़ी रास्ते से होते काफी दूर ले गए। सूचना पर वहां पुलिस पहुंची तब ग्रामीणों ने दोनों आरोपियों को सुपुर्द किया। इस घटनाक्रम के बाद किसी तरह की कार्रवाई नहीं होने पर दोनों पीडि़ताओं ने एसपी को 14 अगस्त को अधिवक्ता शूरवीर सिंह यदुवंशी के मार्फत परिवाद भी पेश किया था।
समझौता के लिए डाला दबाव
परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद पुलिस ने उन्हें फलासिया थाने में बुलवाया। 30 हजार रुपए लेकर बलात्कार जैसे जघन्य अपराध में कार्रवाई के बजाय समझौते का दबाव डाला। समझौते के इनकार पर कांस्टेबल मणिलाल ने धमकी दी। परिजनों का आरोप है कि आरोपितों में से एक ने उनके सामने ही पुलिसकर्मियों को पैसे देने की बात कही।
सीडब्ल्यूसी ने लिया संज्ञान
राजस्थान पत्रिका में खबर के प्रकाशन के बाद बाल कल्याण समिति ने संज्ञान लेते हुए घटना को काफी गंभीरता से लिया। समिति की अध्यक्ष डॉ.प्रीति जैन, सदस्य बी.के.गुप्ता, हरीश पालीवाल, राजकुमारी भार्गव व सुशील दशोरा ने फलासिया थाने के बाल कल्याण अधिकारी को निर्देशित करते हुए प्रकरण की तथ्यात्मक रिपोर्ट तत्काल प्रेषित करने के निर्देश दिए तथा नाबालिग को 5 सितम्बर को बाल कल्याण न्यायपीठ के समक्ष पेश करने के लिए कहा है।





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