नई दिल्ली। इस बार भाई-बहन के प्यार का प्रतीक रक्षा बंधन 26 अगस्त को है। इस पर्व को विशेष रूप से मनाने के लिए पीएम मोदी के गृह राज्य में दशकों से रक्षा बंधन का काम करने वाले राधेश्याम लाजा राम गुप्ता और मो. सत्तार इकबाल ने नायाब पहल की है। इन लोगों पीएम मोदी के बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओं के नारे को रक्षा बंधन पर गति देने के मकसद से एक योजना तैयार की है। इस योजना के तहत इस बेटी बचाओं और बेटी पढ़ाओ डिजाइन में रक्षा सूत्र तैयार कराया गया है। इस डिजाइन के रक्षा बंधन को देश भर में बेचा जा रहा है। ताकी हर बहन अपने भाई से बेटी बचाने का वादा रक्षा बंधन के अवसर पर करा सके।
हर बहन करे ये काम
राधेश्याम लाजा राम गुप्ता का कहना कि हम पिछले 40 सालों से इस कारोबार में हैं। मैं राखी की बिक्री को संभालने में कामयाब रहा हूं। जबकि सत्तार ने उन्हें डिजाइन करने में मास्टर हैं। हम दोनों ने मिलकर यह सोचा कि क्यों न भाई-बहन के प्यार के प्रतीक पर्व रक्षा बंधन को एक संकल्प दिवस के रूप में मनाया जाए। इसलिए सत्तार साहब ने बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ डिजाइन में राखी तैयार की है। अब इस राखी को देश भर में हर बहन के पास तक पहुंचाने की जिम्मेदारी मेरी है। इसके पीछे हमारा मकसद बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ की आवाज को बुलंद करना है। उन्होंने इस वर्ष बेटी बचाओ बेटी पदो और स्वच्छ गुजरात नारे के साथ राखी डिजाइन किया। हमारा मकसद ये भी है कि इस बार हर बहन अपने भाई से बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ का संकल्प भी कराए।
बेटियों का आगे बढ़ाना हमारा मकसद
आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ में 2016 में महिला बाल विकास ने रक्षा बंधन के पर्व पर लोगों को जागरूक करने की मंशा से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ व स्वच्छ भारत की राखी बनाई थी। जिसे रक्षा बंधन पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा केन्द्र क्षेत्र के आसपास के स्थानीय जनप्रतिनिधियों, शासकीय कर्मचारियों व गणमान्य नागरिकों को बांधी गई थी। महिला बाल विकास विभाग द्वारा इस तरह की करीब 5 हजार राखियां तैयार कराई गई थी। ऐसा करने के पीछे विभाग का मकसद बेटे और बेटियों के बीच लिंगानुपात के अंतर का कम करने के लिए जागरूक करना था। इसी तरह 2015 में इनरव्हील क्लब आफ गोरखपुर होराइजन ने शहर की परिणयस्थली पर भव्य तीज और राखी मेले का आयोजन किया। इस मेले के माध्यम से उन्होंने देश के पीएम नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया था। अध्यक्ष स्वीटी अग्रवाल ने बताया था कि महिलाओं को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश देना ही इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य है, जिससे बेटियां साक्षर होकर देश, समाज और परिवार के सुख समृद्धि की सूत्रधार बन सकें।





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