प्रतापगढ़ शहर के तलाई मोहल्ला निवासी गोविंदसिंह को लापता हुए साढ़े चार साल हो चुके है। लेकिन अब तक उसका कोई पता नहीं चल पाया है।
साढ़े चार साल बाद भी परिजनों को अब तक उसके जीवित होने की आस है। हालात यह है कि उसके दो मासूम बच्चों को दिलासा देते-देते परिजन भी मायूस हो चुके है। हाल ही में गोविंद के पिता ने प्रधानमंत्री से गुहार लगाई है।इस पर राजस्थान सरकार और निकटतवर्ती एमपी सरकार के गृह विभाग को प्रकरण्ध में आवश्यक कार्यवाही करने और विभाग को अवगत कराने के आदेश दिए है।
यह है मामला
तलाई मोहल्ला निवासी गोविंदसिंह(35) पुत्र रामसिंह स्तर पर प्रोपर्टी का व्यवसाय करता था। इसके साथ ही कुछ लेन-देन का भी काम करता था। वह 30 दिसम्बर 2013 को मोटरसाइकिल लेकर घर निकला था। रात को जब घर नहीं पहुंचा तो दूसरे दिन 31 दिसम्बर को रामसिंह ने कोतवाली में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। जांच में उसका मोबाइल शाम 6 बजे से ही बंद हो गया था। जो निकटवर्ती मध्यप्रदेश के मंदसौर में बताया गया था। वहीं करीब 15 दिन बाद उसकी मोटरसाइकिल मंदसौर के पास झाडिय़ों में मिली थी।इसके बाद आज तक उसका कोई सुराग नहीं मिला है।
पापा का ट्रांसफर हो गया
गोविंद के दो बच्चे हैं। 11 वर्षीय बालक पृथ्वीराज और 6 वर्ष की बालिका आराध्या है।जो गोविंद का फोटो लेकर मां और दादा-दादी से पूछते हैं कि पापा कहां गए? मासूमों को दिलासा देते कि वे नौकरी करते है। इस पर फिर से मासूमों को दिलासा देने के लिए कहते है कि उनका ट्रांसफर हो गया है। इसके बाद तो जवाब नहीं देने पर परिजन भी निरुत्तर हो जाते है। आखिर वे मासूमों को वे क्या जवाब दे कि वे कब आएंगे?
नहीं है बुढ़ापे का सहारा
साढ़े चार साल पहले लापता गोविंद घर में इकलौता पुत्र था। रामसिंह सरकारी नौकरी में थे। जो रिटायर हो चुके है। मां शिवकुंवर भी रिटायर्ड है। पत्नी उर्मिला भी अब अक्सर उदास रहती है।
आखिर जीवित भी है या...?
गोविंद की पत्नी सुमित्रा के आंसू सूख चुके है। उसका एक ही जवाब है कि उसका पति आखिर कहां है? वो जीवित भी है...। यह कहते हुए उसका भी गला भर आया। उसका एक ही जवाब हैकि वह आखिर क्या करें?
राजस्थान, एमपी में कई बार गुहार
गोविंद के पिता रामसिंह और परिजनों के साथ शहरवासियों ने भी यहां कई बार आंदोलन किए। इसके अलावा परिजनों ने राजस्थान सरकार और एमपी सरकार को भी अपनी पीड़ा से अवगत कराया। वहीं पुलिस की ओर से भी विभिन्न पहलुओं के आधार पर जांच की।लेकिन अब तक किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई।
अलग से टीम का गठन
गोविंद के गुमशुदगी के बाद से ही पुलिस बराबर प्रयास कर रही है। इसके लिए अलग से टीमें बनाई हुई हैं। प्रत्येक माह इनसे अपडेट लिया जाता है। पुलिस हर एंगल के आधार पर जांच कर रही है। वहीं एमी पुलिस के सहयोग से टीम बनाई हुई है।जो इस बारे में विशेष जांच कर रही है।
बाबूलाल मुरारिया, थाना प्रभारी, प्रतापगढ़





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