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परिषद सभापति ने सफाई कर्मियों की डयूटी मांगी तो मची खलबली

श्रीगंगानगर.

शहर के पचास में से चौंतीस वार्डों में सफाई के लिए नगर परिषद के स्थायी सफाई कार्मिक की जिम्मेदारी है, लेकिन इनकी संख्या कितनी है, यह सामान्य सा सवाल अब टेढ़ा बन गया है। यह सवाल कोई बच्चा या अनजान पूछे तो शायद नगर परिषद प्रशासन जवाब नहीं दे पाए, लेकिन सवाल जब सभापति अजय चांडक ने किया है तो इसके बावजूद जवाब के लिए उन्हें सही संख्या नहीं बताई जा रही है। इस सवाल ने आयुक्त, स्वास्थ्य अधिकारी और सफाई निरीक्षकों की नींद उड़ा दी है।

 

सभापति ने जब कार्मिकों के विभिन्न एरिया में डयूटी पर कार्यरत होने की सूची मांगी तो आयुक्त ने इसे राजनीति स्टंट बताकर पल्ला झाड़ लिया। सभापति ने जवाब मांगने के लिए बकायदा लिखित पत्र भी दिया है। इसमें पूछा गया है कि उन कार्मिकों के नाम और उनके कार्य स्थल के बारे में बताया जाएं, लेकिन किसी ने भी जवाब नहीं दिया है। परिषद प्रशासन करीब आठ से साढ़े आठ सौ सफाई कर्मियों को वेतन चुका रही है और सोलह वार्डों में ठेकेदार को अलग से भुगतान कर रही हे। इसके साथ-साथ कचरा उठाव के लिए ट्रैक्टर ट्रॉली संचालन के लिए अलग से एक करोड़ रुपए सालाना खर्च कर रही है, लेकिन सफाई व्यवस्था सुधर नहीं रही है।


सफाई ठेकेदार को एक सप्ताह का अल्टीमेटम
नगर परिषद प्रशासन ने अब सफाई ठेकेदार को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। सभापति अजय चांडक ने अपने निजी कार्यालय में ठेकेदार और उसके सफाई निरीक्षकों से सौलह वार्डो की बिगड़ी सफाई व्यवस्था के बारे में फीडबैक लिया। सभापति का कहना था कि यदि अब एक भी शिकायत आई तो भारी जुर्माना लगाया जाएगा।


तब लगाई ड्यूटी और भूल गए
नगर परिषद प्रशासन ने पिछले साल कै टल फ्री सिटी के लिए अभियान चलाया था। कई वार्डों में आवारा घूम रहे पशुओं को पकडऩे के लिए 48 सफाई कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई। कुछ समय बाद अभियान तो रोक दिया गया, लेकिन संबंधित कार्मिकों को वापिस वार्डों में नहीं भेजा गया। इसी तरह नए सफाई ठेके के वार्ड बदले तो वहां पहले से कार्यरत करीब 70 स्थायी सफाई कार्मिकों को अन्य वार्डों में समायोजित नहीं किया गया। ऐसे में यह माना जा रहा है कि वे कार्मिक अब भी उन्हीं वार्डों में काम कर रहे हैं, लेकिन ठेकेदार अपने कार्मिक बताकर उनका भुगतान उठा रहा है। इस मामले की जांच के लिए सभापति ने आयुक्त से रिपोर्ट मांगी है।

 

संख्या दुगुनी, फिर भी व्यवस्था ठप
नगर परिषद के पास करीब चार सौ सफाई कार्मिक थे, वर्ष 2012 में 328 नए सफाई कर्मियों की भर्ती की गई, जिसके बाद संख्या बढ़कर 728 पहुंच गई। पिछले महीने नए 144 में से 119 सफाई कार्मियों की नियुक्तियां करवाई गई तो यह संख्या 849 होनी चाहिए थी। इसके बावजूद सोलह वार्डों में सफाई की जिम्मेदारी ठेका फर्म श्रीश्याम एसोसिएट को दी गई है। ठेकेदार ने दावा किया कि उसके पास करीब चार सौ सफाई कर्मी हैं। यदि ठेकेदार के अधीन अस्थायी कार्मिकों की संख्या जोड़ दी जाएं तो यह संख्या 1249 हो जाती है। इसके विपरीत शहर में सफाई व्यवस्था इतनी बदत्तर है कि कलक्टर को हर सप्ताह नगर परिषद प्रशासन को फटकार लगानी पड़ रही है।

 

हकीकत बताने में परहेज क्यों?
यह सही है कि नगर परिषद प्रशासन ने सफाई कर्मियों की डयूटियां लगाने में मनमर्जी कर रखी है। ऐसे में सफाई व्यवस्था की पटरी पर नहीं आ रही है। मैंने तो सामान्य सी जानकारी मांगी है कि वार्डों में कौन-कौन कर्मचारी काम कर रहा हैं? इसका जवाब देने में परहेज क्यों किया जा रहा है? यह समझ से बाहर है।
अजय चांडक, सभापति, नगर परिषद

 

ड्यूटी लगाने से उखड़े
क एक सफाई कर्मचारी का हिसाब किताब है। हाजिरी रजिस्टर में उपस्थिति तब ही दर्ज की जाती है जब संबंधित सफाई कार्मिक डयूटी पर आता है। दरअसल नए सफाई कार्मिकों को छह वार्डो में समायोजित किया गया है, इन कार्मिकों को डयूटी देने के संबंधित आदेश के दौरान सभापति से राय नहीं ली गई है, इस बात को लेकर यह बखेड़ा जा रहा है।
सुनीता चौधरी, आयुक्त नगर परिषद



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