सीकर. जैन मुनि विश्रान्त सागर महाराज ने सकल दिगंबर जैन समाज की धर्म सभा में शनिवार को पहनावे को लेकर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा,
परिणामों में विकृति का प्रमुख कारण है वेशभूषा। आजकल की महिलाओं की वेशभूषा ऐसी हो गई है जिसके कारण परिणाम में विकृति आ ही जाती है। फैशन के चक्कर में भारतीय संस्कृति सादा जीवन उच्च विचार को भुलाया जा रहा है। आजकल का पहनावा संस्कृति को खराब कर रहा है।
उन्होंने कहा, कोई मन से दुखी है कोई तन से दुखी है तो कोई धन से दुखी है। संसार में दुख एक कल्पना व सोच मात्र है। कोई परिस्थिति किसी के लिए सुख का कारण होती है तो किसी के लिए दुख का कारण। दहेज प्रथा पर कहा कि जिसने अपनी बेटी दे दी, उसने सबसे बड़ा दहेज दे दिया। फिर भी अगर कोई बेटी वाले से दहेज मांगता है तो उसे बड़ा कोई भिखारी नहीं है। ऐसे लोगों को तो कटोरा दे देना चाहिए, बेटी नहीं देनी चाहिए।
शनिवार की मांगलिक क्रिया जुगल किशोर पिराका की ओर से की गई। मंगलाचरण नेहा विनायक्या ने प्रस्तुत किया। प्रियंक जैन ने बताया कि इस दौरान सकल दिगंबर जैन समाज के अनेक लोग उपस्थित थे
इधर
गीता प्रेस की दुकानों के सामने चल रहे संत डूंगरदास के प्रवचन सुनने प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। शनिवार को डूंगरदास ने कहा कि जो भगवान का ध्यान करते हैं वे भाग्यशाली हैं। जो भगवान को छोड़कर विषयों से प्रेम करते हैं वे अभागे हैं। रावण ने अपने किसी परिवार के सदस्य की बात नहीं मानी, इस कारण उसका अंत हुआ।
श्रीमाधोपुर. कस्बे के गौ गढ़ बाबा ब्रह्मचारी आश्रम परिसर में संत आत्मानंद ब्रह्मचारी की पुण्यतिथि के उपलक्ष में चल रही शिव महापुराण कथा में शनिवार को द्वादश ज्योर्तिलिंगों की कथा सुनाई गई। कथावाचक उत्तराखंड के पं. दुर्गादत्त शास्त्री ने शिव के बारह ज्योतिर्लिंग की महिमा के बारे में बताया। आश्रम के महन्त बाबा सतगीरि महाराज ने बताया कि रविवार को सुबह बाबा आत्मानन्द ब्रह्चारी जी महाराज की मूर्ति का अभिषेक कराने के बाद महाआरती कर प्रसाद वितरण के साथ कथा का समापन्न होगा।





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