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चुनावी मौसम में महापौर को याद आए पार्षद, अफसरों से बोले मेयर — पार्षदों के फोन उठाओ, जो वो कहें करो

जयपुर। राजनीतिक दल प्रदेश में विधानसभा चुनाव का बिगुल बजा चुके हैं। सत्ताधारी पार्टी चुनावी मौसम में रूठों को मनाने की कवायद में जुट गई। इसकी बानगी राज्य सरकार से लेकर शहरी सरकार तक में देखने को मिल रही है। ताजा मामला जयपुर नगर निगम का है।
नगर निगम में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही भाजपा पार्षद अपनी ही पार्टी के महापौर पर अनदेखी करने का आरोप लगा रहे थे। भाजपा पार्षदों ने तो नगर निगम की साधारण सभा में सार्वजनिक रूप से महापौर पर अधिकारियों का पक्ष लेने के आरोप लगाए। इसके बावजूद पार्षदों की कोई सुनवाई नहीं हुई। अब विधानसभा चुनाव में करीब 3 महीने का समय बाकी है, इसे देखते हुए शहरी सरकार के मुखिया ने पार्षदों को खुश करने की कवायद शुरू की है। अब महापौर अशोक लाहोटी ने निगम के जोन उपायुक्तों सहित अन्य अधिकारियों को पार्षदों के साथ बैठक कर पार्षदों के बताए विकास और जनहित कार्य की प्राथमिकता से पूरे करें। साथ ही कहा कि सभी अधिकारियों पार्षदों का फोन तत्काल उठाएंगे और फोन पर उनकी बात सुनेंगे। कोई भी अधिकारी जनप्रतिनिधियों के फोन की अनदेखी नहीं करेगा। महापौर सोमवार को नगर निगम के सभागार में नगर निगम के जोन उपायुक्तों और विभिन्न शाखाओं के उपायुक्तों की बैठक ले रहे थे। इसी बैठक में अधिकारियों को पार्षदों की बात को गंभीरता से लेने के लिए कहा। शहरी सरकार पार्षदों के माध्यम से नाराज जनता को खुश करने की कोशिश में जुट गई है।

पट्टा देने में विधायकों की चलेगी
चुनावी मौसम में जनता को खुश करने के लिए पार्षदों ही नहीं बल्कि विधायकों को भी नगर निगम में पूरी तवज्जो मिलेगी। पट्टे जारी करने के मामलों में विधायकों की पूछपरख होगी। पट्टे जारी करने के लिए गठित निगम की एम्पायर कमेटी की प्रत्येक सप्ताह में मंगलवार और शुक्रवार को शाम 4.30 बजे बैठक होगी। इन बैठकों में प्राप्त पट्टा जारी करने सम्बन्धित प्रकरणों का निस्तारण किया जाएगा। महापौर ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि एम्पावर कमेटी की बैठक में सम्बन्धित क्षेत्र के विधायक को विशेष तौर पर आमंत्रित किया जाना सुनिश्चित किया जाएगा। इसी तरह जनता की जनसुनवाई के लिए नगर निगम मुख्यालय और जोन कार्यालयों में कार्यालय समय के दौरान दोपहर बाद 3 से 5 बजे तक अधिकारी लोगों से मिलेंगे। इस दौरान लोगों से प्राप्त शिकायतों का प्राथमिकता से समाधान करेंगे। महापौर के रूख में आए इस बदलाव को 3 महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।



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