हरिसिंह गुर्जर/झालावाड़.राजस्थान के कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट की तीसरी व चौथी यूनिट को राज्य सरकार छतीसगढ़ में स्थापित करना चाहती है। वहां इसकी संभावनाओं का पता लगाने के लिए पांच उच्चाधिकारियों की एक समिति का गठन 27 जुलाई को ही किया है। यह समिति वहां मौजूद पानी व जमीन आदि की संभावना का पता लगाकर उच्च स्तर पर अधिकारियों को रिपोर्ट देगी। जबकि झालावाड़ कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट की इन दोनों इकाइयों के लिए जमीन अधिग्रहण से लेकर मुआवजा आदि की सभी कार्रवाई पूरी कर ली गई है। ऐसे में इनको यहां से दूसरे राज्य में स्थापित करने पर जिले के किसानों की जमीन भी गई और हजारों लोगों को मिलने वाला रोजगार भी नहीं मिल पाएगा। ऐसे में अधिकारी भले ही कोयले के ट्रांसपोर्टेशन पर अधिक खर्चा आने की बात कह रहे हो। लेकिन यहां के मुकाबले दूसरे राज्य में जमीन अधिग्रहण में सरकार को पसीना आ जाएगा तो प्लांट के इतनी निकट पानी की व्यवस्था होना भी मुश्किल होगा। ऐसे हालात में कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट राज्य सरकार के लिए घाटे का सौदा साबित हो सकता है।
इनकी बनाई समिति-
छतीसगढ़ राज्य में कालीसिंध थर्मल प्लांट की सुपर क्रिटीकल तीसरी और चौथी यूनिट के 660 मेगावाट के कोल माइन्स के निकट जमीन, पानी की संभावना को तलाशने के लिए पांच सदस्य समिति बनाई है। विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक एनके कोठारी ने समिति बनाई है। इसमें निगम के मुख्य अभियंता सिविल, अतिरिक्त मुख्य अभियंता (पीपीएमसी एवं टेक्नोलॉजी), उपमुख्य अभियंता (स्पेशल सेल),अधीक्षण अभियंता (पीपी), अधीक्षण अभियंता उर्जा को शामिल किया गया है। यह समिति स्थानीय पानी के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों व जमीन के लिए तहसीलदार व उपखंड अधिकारी से बात कर प्रोग्रेसिव रिपोर्ट निगम के उच्चाधिकारियों को सौंपेगी। सूत्रों ने बताया कि इसके लिए प्रथम चरण में करीब 400 सौ बीघा जमीन अधिग्रहण की जाएगी। जो कालीसिंध की जमीन के मुकाबले बहुत कम है।
तैयारियां पूरी, फिर दूसरे राज्य में क्यों-
सूत्रों ने बताया कि कालीसिंध थर्मल सुपर पॉवर परियोजना की 660-660 मेगावाट की दोनों इकाईयों में करीब 8 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाने हैं। इनको बनाने में 48 माह का समय लगने का भी तय हो गया था। तीसरी व चौथी इकाई के लिए राज्य सरकार ने सैद्धांतिक सहमति भी दे दी गई थी। शेष एनओसी आदि की सभी औपचारिकताएं पहले से पूर्ण है। सिर्फ राज्य सरकार से बजट का इंतजार बना हुआ है। ऐसे में यहां चारों इकाइयों के एक साथ चलने पर जिले में 556.5 लाख यूनिट विद्युत रोजाना मिलेगी जो जिले को बिजली में आत्मनिर्भरता की दृष्टि से मील का पत्थर होगी।
आधारभूत ढांचा तैयार
थर्मल प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि यहां दोनों इकाइयों को शुरू करने के लिए आधारभूत ढांचा है। वर्तमान में कालीसिंध थर्मल की पहली व दूसरी इकाई से 600-600 मेगावाट की दो यूनिट लगी हुई है। जिनसे विद्युत उत्पादन हो रहा है।
ऐसा है थर्मल का खाका-
- थर्मल के लिए 842 बीघा जमीन सरकारी तथा 1388 बीघा निजी भूमि अधिग्रहण की गई है।
-1400 बीघा जमीन में कन्ट्रक्शन हो चुका है।
-600-600मेगावाट की दो यूनिट लगी हुई है।
-पांच गांवों की सीमा में 12 किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है थर्मल।
-आधुनिक तकनीक का एशिया का सबसे बड़ा कूलिंग टावर, ऊंचाई 202 मीटर।
-कुल प्रोजेक्ट कोस्ट 9479.51 करोड़।
-तीसरी और चौथी यूनिट के लिए संभावित बजट करीब 8 हजार करोड़ का।
- समय सीमा 48 माह।
यहां दिया, वहां भी देना होगा मुआवजा -
सरकार ने जिले में 1388 बीघा जमीन का करोड़ों रूपए का मुआवजा किसानों को दिया है। छतीसगढ़ में भी करोड़ों रूपए मुआवजा देना पड़ेगा। यहां के मुकाबले वहां जमीन महंगी होगी। पानी की उपलब्धता भी इतनी सुलभ नहीं होगी। ऐसे में भले ही कॉल माइंस के निकट लगाने का तर्क देकर रेलवे का खर्चा कम करने की बात की जा रही हो। लेकिन वहां से राजस्थान में बिजली लाने पर उतना ही खर्चा बैठ जाएगा। बाहर से बिजली लाने पर मरम्मत आदि पर भी ज्यादा खर्चा होने पर इसका भार उपभोक्ताओं पर ही डाला जाएगा।ऐसे में राज्य में बिजली की दरे और बढ़ जाएगी।
जिले को यह होगा नुकसान-
जिन लोगों की जमीन थर्मल में गई उन्हें तो कोई लाभ नहीं होगा। साथ ही दोनों इकाईयों के दूसरे राज्य में लगने से करीब 900 स्थानिय लोगों को मिलने वाला रोजगार नहीं मिल पाएगा। इसके साथ ही प्रदेश का उद्योग दूसरे राज्य में जाने से राज्य का पैसा सीएसआर योजना में दूसरे राज्यों में लगाया जाएगा। बिजली में आत्मनिर्भर बनने वाला हाड़ौती क्षेत्र इससे अछूता ही रहेगा।
यह बोले अधिकारी-
तीसरी और चौथी यूनिट का मामला जयपुर स्तर पर ही चल रहा है। इस संबंध में समिति जयपुर स्तर पर ही बनी होगी। हमारे पास कोई आदेश नहीं है।
डीपी वर्मा, चीफ इंजीनियर कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट।





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