पाली। लोकमान्य संत रूपमुनि के देवलोकगमन के बाद रविवार को जैतारण स्थित जैन स्थानक में अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ लगी है। इस दौरान कई बड़ी हस्तियां भी अंतिम दर्शन को लेकर पहुंची है। दोपहर एक बजे जैतारण स्थित जैन स्थानक से अंतिम यात्रा रवाना होगी। जो शहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई दोपहर तीन बजे पावन धाम पहुंचेगी। इस दौरान वाहनों की पार्र्किंग से लेकर अन्य स्थानों पर उमड़ते भक्तों की सुरक्षा को लेकर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
बंद है जैतारण, निमाज व आनंदपुरा कालू के बाजार
संत रूपमुनि के देवलोकगमन के बाद रविवार को व्यापारियों व क्षेत्रवासियों द्वारा जैतारण, निमाज व आनंदपुर कालू के बाजार बंद किए गए है। इस दौरान बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
कंधा देने के लिए लगाई गई बोलिया
लोकमान्य संत रूपमुनि महाराज की अंतिम यात्रा से पूर्व जैतारन स्थित जैन स्थानक में अंतिम यात्रा में कंधा देने आदि की बोलियां लगाई गई। संत के अंतिम दर्शन के लिए जैन स्थानक में भीड़ उमड़ रही हैं।
ऐसे बिरले थे संत, जिनका हर वर्ग पर रहा प्रभाव
संत रूपमुनि केवल धर्म के मार्ग पर ही सक्रिय नहीं रहे, अपितु उन्होंने पीडि़त मानवता की सेवा का उद्देश्य पूरा करने के लिए राजनीति और प्रशासन से भी पूरा जुड़ाव रखा। उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत भी संत से प्रभावित थे। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, भाजपा नेता ओमप्रकाश माथुर, राजसमंद सांसद हरिओमसिंह राठौड़, पूर्व सांसद गोपालसिंह शेखावत समेत असंख्य राजनेताओं सहित फिल्मी हस्तियों से भी उनका करीबी जुड़ाव रहा है। ये ही कारण रहा कि अधिकांश समारोहों में ऐसी राजनीतिक व फिल्मी हस्तियां शिरकत करती थी।
विराट पुरुष यदाकदा ही जन्मते : सुकन मुनि
लोकमान्य संत रूपमुनि रजत महाराज के देवलोकगमन पर उनके पार्थिक देह के दर्शन के लिए जैन संतों के साथ जैन स्थानक पहुंचे उप प्रवर्तक सुकनमुनि महाराज ने नवकार मंत्र का जाप करने के बाद वहां उपस्थित श्रावक एवं श्राविकाओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मौत शाश्वत सत्य है और अटल है। मौत के आगे भगवान का कोई वश नहीं चलता। उन्होंने कहा कि जिसने जन्म लिया हैए उसे एक दिन यह संसार छोडऩा ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि रूपमुनि रजत जैसे विराट महापुरुष यदाकदा ही जन्म लेते हैं। उनका जीवन मानव एवं जीवदया के लिए समर्पित था।
समाज के हर वर्ग का किया मार्गदर्शन
-संत रूपमुनि से मेरा गहरा जुड़ाव रहा। उनसे पारिवारिक रिश्ता भी रहा है। वे सामाजिक समरसता के प्रतीक थे। उन्होंने समाज के हर वर्ग का मार्गदर्शन किया। शिक्षा.चिकित्सा के क्षेत्र में संत का योगदान युगों.युगों तक याद किया जाएगा। ऐसे संत को मेरी हार्दिक श्रद्धांजलि। -ओमप्रकाश माथुर, भाजपा नेता एवं सदस्य राज्यसभा





No comments:
Post a Comment