लम्बे समय के बाद नगर परिषद की टीम ने सोमवार देर रात को 50 लावारिश पशुओं को पकड़ा लेकिन उनको कांजी हाउस ले जाने की बजाय नगर परिषद कार्यालय में ही बन्द कर दिया। जब अगले दिन कर्मचारी सुबह कार्यालय पहुंचे तो लावारिश पशुओं से सामना हुआ। पूरे परिसर में गोबर ही गोबर मिला। यही नहीं एक-दो कर्मचारियों के कक्ष में भी पशु घुस गए। जिनको मुश्किल से बाहर निकला। कर्मचारी काफी देर तक बाहर ही रहे। बड़ी मशक्कत के बाद पशुओं को यहां से कांजी हाउस ले जाया गया।
उल्लेखनीय है कि शहर की हर गली, मोहल्ले, सडक़ व बाजारों में लावारिश पशुओं की संख्या कई हजार है। जिसके कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही है। अधिकतर बच्चे व बुजुर्ग लोग लावारिश पशुओं के शिकार हो रहे हैं। लावारिश पशुओं से चोटिल बहुत से लोग अभी तक बैड पर ही हैं। कई बुजुर्गों की पहले मौत भी हो चुकी है। इसके बावजूद भी प्रशासन कई साल से जनता से खिलवाड़ करता रहा है।
रात को पशु मालिकों से झड़प भी
नगर परिषद के निरीक्षक ने बताया कि जब रात्रि को शहर से लावारिश पशुओं को पकड़ा गया तो पशु मालिकों से झड़प भी हो गई। उन्होंने खूब पशुओं को छुड़ाने के प्रयास किए। कुछ पशुओं को इधर उधर ले जाने में सफल हो गए। फिर भी नगर परिषद की टीम ने करीब 50 गायों को पकड़ा। जिनको कांजी हाउस ले जाने की बजाय नगर परिषद के कार्यालय में ही बन्द कर दिया।
चन्द पशु मालिक लाखों को दर्द दे रहे
चन्द पशु मालिक शहर के करीब साढ़े चार लाख लोगों को दर्द दे रहे हैं। जो केवल दो समय पशुओं को दूध निकालने के लिए पकड़ते हैं। बाकी 24 घण्टे पशुओं को शहर में खुला छोड़ देते हैं। ऐसे कुछ पशुपालक प्रशासन के सामने हैं। जो केवल दूध निकालने के लिए पशुओं को दोपहर के समय भी हांक कर लेकर जाते हैं। इसके बावजूद ऐसे गुनहगारों के खिलाफ मुकदमा करने की कार्रवाई में ढिलाई हो रही है।
लोक अदालत ने खूब फटकारा
नगर परिषद प्रशासन को लोक अदालत ने खूब फटकार लगाई है। हैल्पिंग हैड्स के वाद पर बार-बार कार्य योजना मांगने के बावजूद प्रशासन कुछ नहीं कर पाया। आखिर में ढाई साल का समय और दे दिया। लेकिन लावारिश पशुओं के मामले में स्पष्ट कहा गया कि नियमित रूप से पशु खुले छोडऩे वालों के खिलाफ मुकदमें दर्ज कराएं जाएं।
पुलिस का पूरा साथ मिले
अब जरूरत है कि पुलिस का पूरा साथ मिले तभी नगर परिषद की टीम लावारिश पशुओं की समस्या से शहर के लोगों को मुक्त करा सकती है। प्रशासन के स्तर पर बनने वाला कांजी हाउस जल्दी बने। ताकि पशुओं को कहीं भेजने की परेशानी नहीं रहे। गोशालाएं भी लावारिश पशुओं को आसानी से लेने को तैयार नहीं होती है।
रात्रि को लावारिश पशुओं को पकड़ा गया। कुछ घण्टे तक उनको नगर परिषद कार्यालय में रखना पड़ा। सुबह जल्दी कांजी हाउस भिजवा दिया गया। हमारा प्रयास है कि शहर में लावारिश पशुओं की समस्या को जल्दी से जल्दी खत्म किया जाए।
रामकिशोर मीणा, आयुक्त, नगर परिषद अलवर





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