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राजकीय चिकित्सालय में सोनोग्राफी की पांच माह बाद की तारीख....

राजकीय चिकित्सालय में सोनोग्राफी की पांच माह बाद की तारीख....
-प्रशासनिक व्यवस्थागत खामियों की भेट चढ़ती सुविधा
-सरकार का नही है ध्यान, मरीज परेशान
-जितेंद्र जैकी-
झालावाड़. मुख्यमंत्री के गृह जिला मुख्यालय पर स्थित मेडिकल कॉलेज से सम्बद्व दोनो चिकित्सालयों में सोनोग्राफी की व्यवस्था प्रशासनिक खामियों की भेंट चढ़ रही है, वही मरीजों को चिकित्सालय प्रशासन की ओर से पांच महिने बाद साल के अंत की तारीख दी जा रही है। वर्तमान में सोनोग्राफी भी नियम विरुद्व हाथों से संचालित की जा रही है। तीन मशीने उपलब्ध है उनमें से दो चिकित्सक सोनोग्राफी कर रहे है तीसरी मशीन चिकित्सक के अभाव में अनुपयोगी पड़ी है। गम्भीर रोगियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गुरुवार को राजकीय चिकित्सालयों में जब पत्रिका संवाददाता ने मरीजों की पीड़ा देखी तो लोग सोनोग्राफी कक्ष के बाहर निराश नजर आए। दूर दराज क्षेत्रों से परेशान होकर व बीमारी ज्यादा बढऩे पर ही ग्रामीण यहां आते है, गरीब लोगों का भी निशुल्क सोनोग्राफी होने से राहत मिलती है। पेटदर्द के रोगियों के अलावा गर्भवती महिलाओं को भी समय पर सोनोग्राफी नहीं होने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कक्ष के बाहर खड़ी कई महिलाओं ने कहा कि जब बच्चा जन्म ले लेगा उसके बाद सोनोग्राफी का नम्बर आएगा क्या।
-न्यायालय के आदेश दरकिनार
सर्वोच्य न्यायालय के स्पष्ट आदेश है कि सोनोग्राफी केवल पीजी के बाद प्रशिक्षण प्राप्त रेडियोलोजिस्ट द्वारा ही की जा सकती है। लेकिन झालावाड़ में मात्र एमबीबीएस ही सोनोग्राफी कर रहे है। यह चिकित्सक मात्र काम चलाऊ सोनोग्राफी ही कर सकते है अगर कोई गम्भीर समस्या आ जाए तो यह कुछ नही कर सकते है। सामान्य बिमारियों की सोनोग्राफी कर काम चलाया जा रहा है।
-दो चिकित्सक के भरोसे रोज ढाई सौ मरीज
राजकीय एसआरजी चिकित्सालय में सामान्य रुप से करीब डेढ़ सौ मरीज और राजकीय हीरा कुंवर महिला चिकित्सालय में करीब एक सौ मरीज नियमित रुप से सोनाग्राफी के लिए आते है। नियम तो यह है कि अस्पातल में सोनोग्राफी 24 घंटे चालू रहे। लेकिन चिकित्सक सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक आऊटडोर समय तक ही कार्य करते है। इस दौरान राजकीय हीरा कुंवर महिला चिकित्सालय में करीब पचास व राजकीय एसआरजी चिकित्सालय में करीब 25 से 30 मरीजों की सोनोग्राफी ही हो पाती है।
-मरीजों की बीमारी समझने के लिए लिखना जरुरुी
इस सम्बंध में राजकीय एसआरजी चिकित्सालय के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. वाई.के. सनाढय़ व वरिष्ठ सर्जन डॉ.अशोक शर्मा ने बताया कि चिकित्सालय में गम्भीर रोगियों जिसमे पेट दर्द आदि बीमारियों को समझने के लिए मरीजों की सोनोग्राफी की रिपोर्ट अनिवार्य होती है। हम तो जब भी मरीज सोनोग्राफी की रिपोर्ट लाता है तुरंत इलाज शुरु करवा देते है। कई बार सोनोग्राफी की रिपोर्ट देरी से आने तक मरीज की बीमारी का उचित इलाज नही हो पाता और बीमारी गम्भीर होती जाती है। इसलिए सोनोग्राफी रिपोर्ट अगर तुरंत मिल जाए तो मरीज का तुरंत इलाज शुरु हो जाता है व समय रहते वह ठीक हो सकता है।
-मरीजों की पीड़ा
राजकीय एसआरजी चिकित्सालय के सोनोग्राफी कक्ष के बाहर गुरुवार को भटकती जिले के गांव धानोदा निवासी बालिका अंतिमा ने बताया कि वह काफी दिनो से पेट दर्द से परेशान है आज इलाज कराने झालावाड़ आए, डाक्टर को दिखाया उन्होने सोनोग्राफी के लिए लिखा लेकिन यहां तो 21 दिसम्बर की तारीख दी जा रही है। कुछ समझ में नही आ रहा क्या करे।
चिकित्सालय में आऊटडोर में स्थित सर्जन कक्ष के बाहर भटकते जिले के अकलेरा निवासी युवक हेमराज मीणा ने अपनी पीड़ा बताई कि पेट दर्द काफी तेज हो रहा था इसलिए यहां दिखाने आया, डाक्टर ने सोनोग्राफी लिखी लेकिन सोनोग्राफी वालों ने 21 दिसम्बर की तारीख दी है। उसने वापस आकर चिकित्सक से जल्दी की गुहार लगाई लेकिन कोई हल नही निकला। चिकित्सक ने कहा कि बिना सोनोग्राफी की रिपोर्ट के कुछ नही हो सकता है । फिलहाल दर्द की कुछ गोली दवाईयां लेकर काम चलाओं।
-पहले 6 चिकित्सक कार्यरत रहे
राजकीय चिकित्सालयों में तीन मशीनो पर 2015 में 6 चिकित्सक कार्यरत रहे थे। लेकिन धीरे धीरे कम होते गए व अभी मात्र दो के भरोसे अस्पताल में सोनोग्राफी विभाग चल रहा है। इसमें से भी एक चिकित्सक के अवकाश पर जाने पर एक कक्ष में काम बंद हो जाता है। आऊटडोर समय के बाद भी कक्ष पर ताला लग जाता है।
-यह हो सकता है विकल्प
राज्य में सरकार की ओर से कोटा, अजमेर, जोधपुर, जयपुर, बीकानेर व उदयपुर मेडिकल कॉलेज में ही रेडियोलोजिस्ट की पीजी होती है। यहां से रेडियोलोजिस्ट बन निकलने वाले विद्यार्थियों सम्पर्क कर उन्हे यहां लगाया जा सकता है। वैसे भी सरकार की ओर से इनसे अनुबंध किया जाता है कि वह तीन साल तक सरकारी चिकित्सालय में नौकरी करेगें उसके बाद ही उन्हे डिग्री व दस्तावेज दिए जाएगें।
-शहर में संचालित निजी सोनोग्राफी सेंटर के रेडियोलोजिस्टों से भी सम्पर्क किया जा सकता है क्योकि सरकार की ओर से जनता के लिए तो सोनोग्राफी फ्री घोषित है लेकिन सरकार को प्रति सोनोग्राफी 120 रुपए चिकित्सा विभाग को भुगतान करना पड़ता है तो इस कार्य में निजी सोनोग्राफी सेंटर की भी सेवाएं ली जा सकती है।
-झालावाड़ कॉलेज में नही है पढ़ाई
झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में सोनोग्राफी की पढ़ाई के लिए फैकल्टी नहीं होने से यहां से रेडियोलोजिस्ट नही निकल पा रहे। अन्य विषयों में पीजी कर विद्यार्थी अन्य चिकित्सालयों में नौकरी करने के लिए रवाना हो जाते है।
-रेडियोलोजिस्ट को बड़ा पेकेज क्यो नही
कुछ चिकित्सकों ने कहा कि जब मेडिकल कॉलेज की ओर से अन्य बिमारियों के विशेषज्ञों को यहां लगाने के लिए बड़े बड़े पेकेज व सैलरी दी जा रही है तो प्रशिक्षित रेडियोलोजिस्ट को भी तो यहां इसी बेसेज पर लाया जा सकता है।
-हम तो हमारा काम कर रहे है
इस सम्बंध में सोनोग्राफी विभाग के एचओड़ी डॉ.अंकुश माहेश्वरी ने बताया कि हम से जितना हो सकता है उससे भी ज्यादा काम करने का प्रयास कर रहे है। मरीजों की संख्या ज्यादा होने पर आगे की तारीख दी जा रही है।
-सरकार को लिख रखा है
झालावाड़ राजकीय चिकित्सालय में सोनोग्राफी की बिगड़ती व्यवस्था के सम्बंध में अस्पताल अधीक्षक डॉ.राजन नंदा का कहना है कि हमने यहां रेडियोलोजिस्ट की नियुक्ति के लिए सरकार को पत्र लिख कर भेज रखा है। लेकिन वहां से अभी तक कोई कार्रवाई नही हो पा रही है। पूरे राज्य में ही रेडियोलोजिस्ट की डिमांड है, लेकिन उनकी नियुक्ति नही हो पा रही है और नये कोई आ नही रहे है। झालावाड़ में चिकित्सालय में फिलहाल दो चिकित्सक सोनोग्राफी कार्य के लिए लगे हुए है।



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