जयपुर. राज्य सरकार ने मौसमी रोग डेंगू, मलेरिया और स्वाइन फ्लू को अधिसूचित श्रेणी में शामिल कर लिया लेकिन उपचार को लेकर डॉक्टरों में भारी असमंजस है। सर्वाधिक असमंजस निजी अस्पतालों और क्लिनिक के डॉक्टरों में है, जिन्हें चिकित्सा विभाग अब तक नई गाइडलाइन सही तरीके से पहुंचा ही नहीं पाया है। न ही नई गाइडलाइन के बाद अभी तक इसके लिए कोई कार्यशाला या जागरूकता कार्यक्रम हुआ है।
ज्यादा असमंजस उपचार के तरीके को लेकर है। डॉक्टरों में संदेश पहुंच रहा है कि मरीज की रिपोर्ट मलेरिया-डेंगू पॉजीटिव आने के बाद ही उपचार किया जा सकेगा। ऐसे में डॉक्टर तय नहीं कर पा रहे हैं कि जांच रिपोर्ट आने तक उपचार किस तरह शुरू किया जाए। हालांकि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मलेरिया, डेंगू या स्वाइन फ्लू के लक्षण पाए जाने पर मरीज का क्लिनिकल उपचार पहले की तरह ही किया जा सकेगा। लेकिन बीमारी के हिसाब से लाइन ऑफ ट्रीटमेंट उसकी रिपोर्ट आने के बाद ही शुरू होगा।
---------------------------------
जानकारी दी नहीं, जुर्माने का प्रावधान लागू
विभाग हजारों डॉक्टरों तक नई गाइडलाइन तो नहीं पहुंचा पाया लेकिन इसकी पालना नहीं करने वालों पर ५०० रुपए जुर्माने का प्रावधान लागू कर दिया है। इससे डॉक्टरों में रोष है।
---------------------------------
रखना होगा रिकॉर्ड
राजस्थान ऐपिडेमिक अधिनियम 1957 के अंतर्गत मई माह के अंत में मलेरिया, डेंगू और स्वाइन फ्लू को नोटिफायेबल (अधिसूचित) बीमारियों में शामिल किया गया था। इन तीनों के रोगी सरकारी या गैर सरकारी चिकित्सा संस्थानों, क्लिनिक और लैब पर चिन्हित होने पर संस्था प्रभारियों को इनकी सूचना स्थानीय चिकित्सा अधिकारियों को देनी होगी। राज्य में बड़ी संख्या में मरीज जिन नजदीकी क्लिनिकों और छोटे अस्पतालों में जाते हैं, उन्हें भी पूरा रिकॉर्ड रखना होगा।
---------------------------------
कहीं भी की जा सकेगी एंटी लार्वा गतिविधि
इस अधिसूचना के अंतर्गत निरीक्षण अधिकारी को किसी भी परिसर में प्रवेश कर फीवर सर्विलेंस, एंटीलार्वल गतिविधियां और इन बीमारियों की रोकथाम के लिए आवश्यक दवा छिड़काव संबंधी कार्यवाही करने के अधिकार दिए गए हैं। साथ ही संभावित रोगी की ब्लड स्लाइड, घर में पानी एकत्र पाए जाने पर आवश्यकतानुसार एंटीलार्वल गतिविधियां की जा सकेंगी। सभी निजी अस्पताल, क्लिनिक और लैब को इन बीमारियों संबंधी सूचना मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को सूची और पते के साथ देनी होगी। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट पर इलाज, मरीज के घर पर सार-संभाल, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की ओर से बचाव के साधन एवं ए-बी-सी श्रेणी के अनुसार कार्यवाही के लिए दिए गए निर्देशों की पालना करना भी आवश्यक होगा।
---------------------------------
उपचार पहले की तरह ही होगा लेकिन सभी डॉक्टरों को मरीजों का रिकॉर्ड बताना होगा। इससे विभाग मौसमी बीमारियों पर अधिक प्रभावी ढंग से नियंत्रण कर सकेगा। इन बीमारियों के वास्तविक आंकड़े विभाग तक पहुंच सकेंगे। नए नियमों की जानकारी सभी तक पहुंचाई गई है। आगे भी यह प्रक्रिया जारी रहेगी।
- डॉ. नरोत्तम शर्मा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जयपुर प्रथम





No comments:
Post a Comment