जयभगवान उपाध्याय/बीकानेर. श्रीकोलायत के गंगापुर गांव में पांच माह से बॉल क्ले का अवैध खनन होता रहा और खान विभाग के अधिकारी आंखें मूंदे बैठे रहे। मामले की भनक जब जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को लगी तो उन्होंने इसकी शिकायत खान विभाग से की। मामले की परतें खुली तो लीजधारक की ओर से खान विभाग को दिया गया अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) ही फर्जी निकला।
फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद जल संसाधन विभाग की ओर से खान विभाग को सौंपी चिट्ठी के बाद वहां के अधिकारियों में हड़कम्प मचा हुआ है। आनन-फानन में खान विभाग के अधिकारियों ने बॉल क्ले की अवैध खुदाई करने वाली फर्म भगवान दास चन्द्र कुमार एण्ड कम्पनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अधिकारियों ने लीजधारक से जल संसाधन विभाग की एनओसी के बारे में भी स्पष्टीकरण मांगा है।
दर्ज करवाया मामला
जल संसाधन विभाग के कनिष्ठ अभियंता केशाराम ने बताया कि विभाग ने इस कम्पनी को कभी एनओसी जारी नहीं की। इसके बावजूद कम्पनी लगातार बॉल क्ले का अवैध खनन करती रही। कम्पनी के खिलाफ खान विभाग के उच्चाधिकारियों से शिकायत की गई है। वहीं गजनेर थाने में मामला भी दर्ज करवाया गया है।
यूं चला फर्जीवाड़े का खेल
श्रीकोलायत के गंगापुर गांव स्थित चक संख्या ७ के खसरा नम्बर ७३-७४ में बॉल क्ले खनन को लेकर लीजधारक भगवान दास चन्द्र कुमार एण्ड कम्पनी ने खान विभाग के बीकानेर कार्यालय में आवेदन किया था। वर्षों से यह फाइल खान विभाग में घूम रही थी, लेकिन जलभराव क्षेत्र (कैचमेंट एरिया) होने के कारण उसे जल संसाधन विभाग ने एनओसी जारी नहीं की। इसके बाद कम्पनी ने अप्रेल-२०१५ में पुन: एनओसी के लिए आवेदन किया।
विभाग ने मौका निरीक्षण करने के बाद फिर एनओसी जारी करने से इनकार कर दिया। इसकी सूचना खनिज विभाग के स्थानीय अधिकारियों को भी दी गई। नियमानुसार यह फाइल उसी समय निरस्त हो जानी थी, लेकिन खान विभाग ने इस प्रकरण को सेव्ड मोड में डाल दिया।
आरोप है कि इसके बाद कम्पनी ने दिसम्बर-२०१७ में जल संसाधन विभाग के बीकानेर कार्यालय की फर्जी एनओसी जोधपुर स्थित अतिरिक्त खान निदेशक (एडीएम) आरएल उदई के समक्ष पेश की। सूत्रों की मानें तो एनओसी पर दिनांक और डिस्पेच नम्बर अंकित नहीं होने के बावजूद तत्कालीन अधिकारी ने एनओसी को फाइल में संलग्न कर आगामी कार्रवाई के लिए खान विभाग कार्यालय बीकानेर भेज दी।
बिना सत्यापन अनुमति
जोधपुर के अधिकारियों की तर्ज बीकानेर के तत्कालीन खनिज अभियंता राकेश सेशमा ने कम्पनी को मार्च-२०१८ में एनओसी का सत्यापन करवाए बिना एग्रीमेंट कर खनन की अनुमति दे दी। इसके बाद अवैध खनन का खेल शुरू हुआ, जो पिछले दिनों तक जारी था। मामले का भंडाफोड़ तब हुआ, जब जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने कैचमेंट एरिया का निरीक्षण किया। निरीक्षण के समय मौके पर बॉल क्ले का अवैध खनन हो रहा था। कम्पनी के लोगों से पूछे जाने पर उन्होंने जल संसाधन विभाग की एनओसी होना बताया, जबकि विभाग ने इसकी एनओसी जारी ही नहीं की।
खनन पर लगाई रोक
जल संसाधन विभाग की फर्जी एनओसी का पता लगने के बाद संबंधित फर्म को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। साथ ही संबंधित क्षेत्र में हो रहे खनन पर भी रोक लगा दी है। मामले के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है।
मनीष वर्मा, खनिज अभियंता, खान विभाग बीकानेर





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