कोटा. जिले में भ्रमणशील शल्य चिकित्सा इकाई (मोबाइल यूनिट) अपना उद्देश्य पूरा नहीं कर पा रही है। इकाई को ग्रामीणों को चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए लाखों रुपए खर्च कर विभिन्न उपकरणों से सुसज्जित वाहन उपलब्ध करवाया गया पर अभी तक यह एक भी शिविर में उपयोगी साबित नहीं हुआ। विभागीय अनदेखी व वाहन पंजीकरण के फैर में 10 वर्षों से यह भ्रमणशील इकाई 'स्थिरÓ है।
वाहन एमबीएस अस्पताल में महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता प्रशिक्षण केन्द्र के भवन परिसर में खड़ा है। वर्षों से धूप व बरसात में खड़े रहने से इसके टायर खराब हो चुके। पहियों में जंग लगा है। बॉडी का रंग फीका पड़ गया और जंग लग रहा है। केबिन में धूल जमा है। वाहन पर ताला लगा है। इसमें ऑटोक्लेव व जनरेटर सिस्टम बताया जाता है। शुरू में कुछ वर्षों तक यह विज्ञान नगर स्थित डिस्पेंसरी में खड़ा रहा।
नौ साल अटका रहा पंजीकरण
जानकारी में आया है कि वाहन की बॉडी बनाने वाले कॉन्ट्रेक्टर ने बॉडी बिल्डिंग कम्प्लीटिशन का प्रमाणपत्र ही विभाग को प्राप्त नहीं हुआ। इससे इसका नगर परिवहन विभाग में पंजीकरण नहीं हो सका। गत वर्ष ही इसका पंजीकरण करवाया गया है।
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इसलिए आया था
चिकित्सा विभाग द्वारा प्रदेशभर में बहुउद्देश्यीय चिकित्सा शिविरों में रोगियों को जहां रह रहे हैं, वहीं उपचार मिले, इस दृष्टि से जयपुर से वाहन उपलब्ध करवाया था। वाहन में जनरेटर, ऑटोक्लेव व अन्य सुविधाएं हंै। चिकित्सा विभाग सितम्बर से अप्रेल तक विभिन्न स्थानों पर शिविरों का आयोजन करता है।
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अब सिर्फ एक एम्बुलेंस
यूनिट के पास फिलहाल एक पुरानी एम्बुलेंस है। छोटे शिविरों के लिए एमबीएस से वाहन का बंदौबस्त करना पड़ता है। बड़े शिविर लगते हैं तो जयपुर से ही वाहन आते हैं। टेंट व अन्य व्यवस्था भी जयपुर से ही होती है।
कौन करे संचालन
भ्रमणशील शल्य चिकित्सा इकाई में 5 चिकित्सक, छह कम्पाउण्डर हैं। दो चिकित्सकों के पद रिक्त हैं। विज्ञान नगर में स्थित ऑपरेशन थियेटर भी है, लेकिन इस वाहन का चालक नहीं है। वहीं जनरेटर व ऑटोक्लेव को ऑपरेट करने वाला कर्मचारी भी नहीं है।
इनका है कहना...
भ्रमणशील यूनिट के लिए वाहन कब आया था, यह नहीं बता सकता, लेकिन पंजीकरण नहीं होने के कारण इसे रोड पर नहीं चलाया गया। बड़े शिविरों की व्यवस्था जयपुर से होती है।
-डॉ के जी सिंघल, भ्रमणशील शल्य चिकित्सा इकाइ





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