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बच्चों की थाली से गायब हुए गेहूं-चावल

 

केस.1
राजकीय प्राथमिक स्कूल प्रेमनगर द्वितीय में जुलाई में चावल खत्म हो चुके हैं। गेहंू भी दो-तीन दिन का और बचा है। ऐसे में बच्चों के लिए पोषाहार खत्म होने की नौबत आ गई है। यहां 240 नामांकित बच्चे हैं।

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केस.2

राउमावि इन्द्रा गांधी में जून में ही चावल खत्म गए थे, गेहूं भी छह कट्टे बचे हैं। एक सप्ताह में गेहूं भी नहीं आया तो पोषाहार बंद हो जाएगा। इस स्कूल में 401 बच्चे नामांकित हैं।

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अभिषेक गुप्ता

कोटा. स्कूली बच्चों को एक गिलास दूध पिलाकर सरकार ने खूब वाहवाही लूटी, लेकिन अफसरों की लापरवाही से अब बच्चों की थाली से गेहूं और चावल ही गायब हो गए हैं। सरकारी मशीनरी तीन माह से फाइलों में ही गेहूं और चावल बांट रही है। हकीकत यह है कि अभी पोषाहार के नए टेण्डर तक नहीं हुए। इस कारण स्कूलों में जुलाई माह का पोषाहार नहीं पहुंचा। स्कूलों में चावल तो खत्म हो गए हैं, बचे हुए गेहूं से काम चलाया जा रहा है।
पत्रिका टीम ने गुरुवार को शहर के पोषाहार वितरण का सच जाने के लिए सरकारी स्कूलों में पड़ताल की तो यह हकीकत सामने आई। पूरी जुलाई बिना चावल के निकल गई। गेहूं भी कुछ स्कूलों में ही बचा है।

रसद विभाग ने जुलाई बीत जाने के बाद भी अब तक पोषाहर का आवंटन नहीं किया। इस कारण स्कूलों में पोषाहर नहीं पहुंचा। हर तीन माह में स्कूलों में पोषाहर का आवंटन किया जाता है। उसके बाद शिक्षा विभाग के माध्यम से उसका उठाव होता है। उठाव के बाद स्कूलों में पोषाहार वितरित किया जाता है। इस बार फरवरी तक ही पोषाहर के गेहूं व चावल का आवंटन हुआ।

शिक्षा विभाग के अनुसार, जून, जुलाई व अगस्त तीन माह का एक साथ गेहूं 488.82 मीट्रिक व चावल 201.70 मीट्रिक टन का आवंटन होना है।

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वर्जन.....

चावल खत्म, गेहूं कुछ दिन का

स्कूल भी चावल खत्म हो चुके हैं। गेहूं भी कुछ ही दिनों का शेष है। - बालेन्द्र चौधरी, पोषाहर प्रभारी, राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल इंद्रा गांधी नगर
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नए आवंटन के बाद ही पहुंचेगा

स्कूलों के लिए फरवरी में गेहूं व चावल का आवंटन हुआ था। उसके बाद नहीं हुआ। कुछ बचा था, जो जुलाई में कुछ स्कूलों में आवंटन कर दिया। अब नया आवंटन होने के बाद ही स्कूलों में पोषाहार पहुंच पाएगा। - विपुल महाजन, सप्लायर्स

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फाइल कलक्टर के पास

स्कूलों में पोषाहर सप्लाई के लिए रसद विभाग की ओर से निविदा जारी हो चुकी है। फाइल जिला कलक्टर के पास है। वहां से अनुमति मिलने के बाद ही गेहंू व चावल का आवंटन हो पाएगा। -नौनिहाल गुप्ता, लेखाधिकारी, पोषाहर, प्रारंभिक शिक्षा



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