जालोर. बारिश की बेरूखी के साथ ही फसलों में कातरा लट (रेड हेयरी) का प्रकोप दिखने के बाद कृषि महकमे ने जिले में हाइअलर्ट कर दिया है। सुपरवाइजर से लेकर कृषि अधिकारी तक फील्ड विजीट पर है। खेतों में खराबे का आकलन करने एवं किसानों को जागरूक करने के आदेश दिए गए हैं। निरीक्षण के दौरान किसानों को बचाव के उपाय बताए जा रहे हैं। साथ ही लट का फैलाव रोकने की जानकारी भी दी जा रही है। जालोर तहसील के बागरा, नारणावास, धवला, नागणी, भीनमाल तहसील के सेवड़ी आदि गांवों में भी कातरा का प्रकोप देखा गया है। फसल की पत्तियां सफाचट कर रही लट से किसान भारी नुकसान उठा रहे हैं। हालांकि कृषि विभाग की ओर से लट से बचाव के उपाय बताए जा रहे हैं, लेकिन लट का प्रकोप देखते हुए यह इंतजाम नाकाफी लग रहे हैं। नारणावास के रूपसिंह राठौड़ ने बताया कि क्षेत्र में कातरा लट के प्रकोप से फसलों को काफी नुकसान हुआ है। विभाग की ओर से बताए उपायों से बचाव के प्रबंध किए जा रहे हैं। अधिकारी बताते हैं कि अपेक्षाकृत शैशवावस्था में होने पर लट का निदान संभव है। बड़ी हो जाने पर दवा के भुरकाव से भी इसे ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचता।
खेतों में हो रहा दवा का छिड़काव
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल पर दवा के भुरकाव व छिड़काव को लेकर जागरूक किया, ताकि लट खत्म हो सके। लट का प्रकोप दिखने के बाद जिन गांवों में कृषि महकमा पहुंचा है, वहां उपाय शुरू भी हो गए हैं। नारणावास गांव के खेतों में किसान दवा का भुरकाव करते नजर आए। किसानों ने बताया कि फसल पर बैठी लट खत्म करने के साथ ही खाई खोदी जा रही है, जिससे कि लट अन्य खेतों तक नहीं पहुंच पाए।
पशु चराई पर संकट के बादल
ग्रामीणों ने बताया कि कातरा की चपेट में आने से खतरपवार व अन्य पौधों की पत्तियां भी खत्म हो गई। नागणी निवासी दिनेश भट्ट ने बताया कि खेतों में फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। बारिश के बाद उगी घास व खरपतवार पशु चराई के काम आती है, लेकिन लट ने कई जगह घास भी चट कर दी। इससे पशु चराई पर भी संकट आएगा।
खेतों का निरीक्षण करने निकले कृषि वैज्ञानिक
जालोर. फसलों में कातरा (रेड हेयरी) लट का प्रकोप सामने आने के बाद कृषि वैज्ञानिक खेतों का निरीक्षण कर रहे हैं। लगातार गांवों में जाकर किसानों को बचाव के उपाय सुझाए जा रहे हैं। जिला मुख्यालय से सटे गांवों का दौरा किया गया। कृषि अधिकारी फूलाराम मेघवाल ने बताया कि सोमवार को मिठड़ी, बादनबाड़ी, हनवंतगढ़, महेशपुरा, सामुजा आदि गांवों में अवलोकन किया गया। इस दौरान किसानों को कातरा लट से बचाव के उपाय बताए गए। लट के प्रकाह्यप वाली फसलों पर दवा का भुरकाव करने की सलाह दी गई। साथ ही लट को एक खेत से दूसरे खेत में नहीं जाने देने के प्रयास करने का सुझाव दिया गया। इसके लिए खेत के चहुंओर खाई खोदने की बात कही। कृषि विज्ञान केंद्र की डॉ. नेहा गहलोत, डॉ.प्रकाश यादव, डॉ.धर्मेंद्र मीणा, नाहरसिंह देवड़ा, सहायक कृषि अधिकारी छतराराम लहवा आदि साथ रहे।
बड़ी लट का नियंत्रण नहीं हो रहा
गांव में चौपाल के दौरान किसानों ने बताया कि राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित समाचार के आधार पर कृषि अधिकारियों की सलाह पर अमल किया गया।खेत के चहुंओर खाई खोद चुके हैं तथा दवा का भुरकाव भी किया गया, जिससे कातरा लट नियंत्रण में आ रही है। बड़ी हो चुकी लट का नियंत्रण करने में कुछ मुश्किल आ रही है।
हरकत में आया कृषि विभाग
उल्लेखनीय है कि कातरा लट का प्रकोप होने पर किसान चिंतित है। राजस्थान पत्रिका ने इस सम्बंध में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया, जिस पर कृषि विभाग हरकत में आया तथा जले में हाइअलर्ट जारी करते हुए सभी कार्मिकों को खेतों में जाने तथा बचाव के उपाय सुझाने के निर्देश जारी किए हैं। नारणावास, सियाणा, नागणी, नबी, बादनबाड़ी, भीनमाल के सेवड़ी समेत कई गांवों में कातरा लट का प्रकाप देखा जा रहा है।
बैरी बनी कातरा लट, खेत कर रही चट
सियाणा. कुछ दिनों पहले हुई बारिश से कई किसानों ने अच्छे जमाने की आस को लेकर खेतों में बाजरा, मूंग, तिल, ग्वार व अन्य फसले बोई थी, लेकिन बारिश ने दगा दे दिया। रही-सही कसर कातरा लटने पूरी कर दी। किसान कालुसिंह ने बताया कि कुछ दिनों पहले हुई बारिश से तुंडा भाखरी, नबी, मायलावास सहित गांवों के किसानों ने फसल बोई थी, लेकिन इन दिनों कातरा लट का प्रकोप खराबा कर रहा है। कई खेतों में फसल चट कर चुकी है। पौधों को उगते-उगते ही खा लिया।किसानों ने बताया कि भारी संख्या में लट होने से फसलों मेंज्यादा नुकसान हो रहा है। मायलावास व कटकेश्वर मंदिर के रास्ते में एक खेत से दूसरे खेत में आती लट देखी जा सकती है।कृषि विभाग को इसकी जानकारी मल चुकी है, लेकिन बचाव के कोई प्रबंध नहीं किए जा रहे।गत वर्ष फसलों में हुए खराबे का मुआवजा भी सियाणा के किसानों को अभी तक नहीं मिला है औरयह फसल भी बर्बाद हो रही है।उधर, कृषि पर्यवेक्षक जबरसिंह ने बताया कि तुंडा, नागणी, नबी व मायलावास में कातरा लट का प्रकोप ज्यादा है। बचाव के उपाय अपनाने पर जोर दिया।
निरीक्षण के दिए निर्देश
कृषि अधिकारी बताते हैं कि कुछ गांवों के किसानों ने कातरा लट की समस्या बताई है। कई जगह सुपरवाइजर के पास भी ऐसी सूचना आई। इसके बाद खेतों का निरीक्षण किया गया। अन्य गांवों में भी कातरा का प्रकोप हो सकता है, लिहाजा जिन जगहों से कातरा लट की कोई जानकारी सामने नहीं आई है वहां भी एहतियातन निरीक्षण कर बचाव के उपचार करने के निर्देश दिए हैं।
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... ताकि नुकसान न हो
कातरा लट की रोकथाम के लिए बचाव के उपाय जरूरी है। लट पर दवा का भुरकाव करना चाहिए। लट को खत्म करने के हर संभव उपाय अपनाने पर जोर दें, ताकि फसलों में नुकसान न हो।
- फूलाराम मेघवाल, कृषि अधिकारी, जालोर





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