श्रीगंगानगर.
करीब साढ़े पांच साल पहले नगर परिषद ने नियम कायदों की अनदेखी कर अपात्रों को सफाई कार्मिक की नौकरी दे दी थी। तब शिकायत के बावजूद प्रकरण को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया लेकिन अब पार्षदों के दबाव के चलते नगर परिषद प्रशासन ने जांच कमेटी गठित कर दी है। इस कमेटी का गठन होते ही उस समय नियुक्त सफाई कार्मिकों में खलबली मच गई है। तत्कालीन सभापति जगदीश जांदू के कार्यकाल में नगर परिषद में ३२८ सफाई कर्मचारियों का चयन किया गया था।
तब भी यह शिकायत हुई थी कि इन ३२८ में से करीब १२० एेसे लोगों का चयन किया गया जिन्होंने नगर परिषद में कभी सफाई का काम नहीं किया, इन १२० लोगों के नाम मस्टररोल रजिस्टर में दर्ज कर पात्रता की श्रेणी में मान लिया गया। इसके पीछे राजनीतिक एप्रोच बताई जा रही है। आयुक्त को की गई शिकायत में पार्षद रवि चौहान के अलावा पार्षद पति कश्मीरीलाल इंदौरा, मदनलाल, राजकुमार आदि के हस्ताक्षर हैं।
तलाकशुदा के नाम पर पाई नियुक्ति
दो महिला सफाई कार्मिकों की शिकायत भी हुई है, इस शिकायत में यह आरोप लगाया है कि तलाकशुदा कोटे में चयन करने के लिए इन महिलाओं ने अपने पति से सिर्फ स्टांप पर तलाक संबंधित दस्तावेज बनवाकर नौकरी हथिया ली। नियमानुसार कोर्ट से तलाक की डिक्री होनी चाहिए थी। संबधित महिलाएं अपने पति के साथ रहवास कर रही है। इसी तरह तीन कार्मिक एेसे हैं जिनकी मां और बेटी की आयु में सिर्फ पांच साल का अंतर है।
बिहाइंड द स्टोरी
नगर परिषद प्रशासन ने पिछले माह १४२ सफाई कर्मियों को नियुक्ति दी है। अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस और वाल्मीकि सभा चयनितों की जांच की मांग कर रहे हैं। इन संगठनों का कहना है कि परिषद ने लॉटरी से कुछ एेसे कार्मिकों का चयन कर लिया जिन्होंने किसी भी जगह सफाई कार्य किए बिना अनुभव प्रमाण पत्र हथिया लिया। जब मजदूर कांग्रेस ने शहर में सफाई कार्य बंद करवा हड़ताल कर धरना लगाया तो नगर परिषद सभापति अजय चांडक और आयुक्त सुनीता चौधरी ने सभी चयनितों के अनुभव प्रमाण पत्रों की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी। एेसे में नवनियुक्त कार्मिकों के परिजनों ने अब सफाई यूनियन के पदाधिकारियों को घेरने के लिए वित्तीय वर्ष २०१२-१३ में नियुक्त ३२८ कार्मिकों की जांच के लिए मोर्चा खोला है।
चार सदस्यीय कमेटी करेगी जांच
आयुक्त सुनीता चौधरी ने जांच कमेटी गठित की है। इसमें स्वास्थ्य अधिकारी देवेन्द्र प्रताप सिंह, एईएन सुखपाल कौर, राजस्व अधिकारी जुबेर खां और सहायक प्रशासनिक अधिकारी अरविन्द कुमार को शामिल किया गया है।





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