बूंदी. किसानों को अब पौधारोपण करने पर अनुदान मिलेगा। इस योजना का लाभ किसान खेती की सीमा (मेड़) पर पौधारोपण करने पर ही ले सकेंगे। यह होगा कृषि वानिकी सब मिशन योजना के तहत।
कृषि में जोखिम को देखते हुए भारत सरकार ने राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति बनाई है, जिसका मुख्य उद्देश्य कृषि वानिकी क्षेत्र में संगठित रूप से विकास करना है। विभाग के अनुसार इस योजना से किसान पशुपालन व खेती के साथ ही पौधारोपण कर अपनी आय बढ़ा सकेंगे। इसका मुख्य उद््देश्य वृक्ष आच्छादित कर कार्बन उत्सर्जन को कम करना और गुणवत्तायुक्त रोपण सामग्री की उपलब्धता को सुनिश्चित करना है।
ऐसे मिलेगा अनुदान
अनुदान लेने के लिए किसान को कम से कम ५० पौधे लगाने होंगे। पौधारोपण के लिए एक पौधे की लागत ७० रुपए मानी है। किसान को भूमि की सफाई, गढ्डे खोदने, पौधे लगाने व रखरखाव करना होगा। इसके बाद विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर भौतिक सत्यापन करेगी। इसके बाद अनुदान दिया जाएगा। इन पौधों की एवज में किसान को चार साल की अवधि में किस्तों के रूप में १४०० रुपए का अनुदान मिलेगा।
ऑनलाइन करना होगा आवेदन
किसानों को योजना में अनुदान के लिए ऑनलाईन आवदेन करना होगा। उन्हें ई-मित्र पर जाकर योजना में शामिल होने के लिए आवश्यक दस्तावेज लाने होंगे। प्रकिया के तहत किसानों को जमांबदी, खसरा नंबर, भामाशाह कार्ड, आधार कार्ड, सिंचाई का स्त्रोत, मृद्वा परीक्षण व बचत खाते की कॉपी के साथ आवेदन करना होगा।
पौधे का प्रकार व नाम
फलदार वृक्ष-आम, जामुन, गुंदा, बेल पत्र, लसोड़ा, अमरूद, शहतूत, अनार, आंवला, गुंदी, इमली, नींबू, महुआ, करोंदा, पीपला, बेर, सीताफल, खिरनी आदि।
छायादार वृक्ष- बड़, पीपल, सैंजना, नीम, कंरज, सिरस, कदम्ब, महुआ, अर्जुन, कोहडा आदि।
इमारती लकडी देने वाले वृक्ष शीशम, बबूल, रोहिडा, सिरसा, सागवान, बांस, पॉपलर आदि।
जलाऊ लकडी देने वाले वृक्ष- देशी बबूल, खेजडी, जंगल, जलेबी, चुरैल आदि।
चारे वाले वृक्ष- खेजडी, अरडू, सहजना (सेंजना), नीम, पीपल, पाला (बेर की झाडी) गूंदी, बकाइन आदि।
अन्य- चंदन, कमूठा, बहेडा, तैंदू, अमलतास, कचनार, गुलमोहर, सिल्वर, ओक, अशोक आदि।
किसान अपने खेत या बगीचे में योजना के तहत किसी भी तरह के पौधे लगा सकता है। इस पर किसान को अनुदान दिया जाएगा। इसके लिए किसान को ऑनलाइन आवेदन करना होगा।’
रामनिवास पालीवाल, उपनिदेशक (कृषि) अधिकारी, बूंदी





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