प्रतापगढ़. किसी भी जन्मजात बच्चे के लिए उसकी मां का पहला दूध सबसे बड़ी औषधी या टॉनिक होता है, लेकिन अफसोस की बात यह है कि भारत में 44 फीसदी बच्चों को मां का पहला दूध नहीं मिल पाता है, शिशुओं को जन्म के बाद शुरुआती पहले घंटे में स्तनपान नहीं कराया जाता है, जो उन्हें रोगों के उच्च जोखिम की ओर ले जा सकता है। इसी के मद्देनजर एक से लेकर 7 अगस्त तक पूरी दुनिया में स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा है। यह बात विशेषज्ञों ने गुरूवार को जिला चिकित्सालय के एमसीएच विंग में विश्व स्तनपान सप्ताह पर आयोजित संगोष्ठी में कही। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ वी के जैन, पीएमओ डॉ आर एस कच्छावा, डिप्टी कंट्रोलर डॉ ओ पी दायमा, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ धीरज सेन व सारांश संबल, नर्सिंग अधीक्षक राधेश्याम शर्मा ने संगोष्ठी में स्तनपान को लेकर जानकारी दी। सीएमएचओ वी के जैन ने कहा कि मां के दूध की आवश्यकता और फायदे को देखते हुए राजस्थान में मदर मिल्क बैंक खुल रहे हैं। पीएमओ डॉ आर एस कच्छावा ने प्रतापगढ़ जिले में भी जिला चिकित्सालय में मदर मिल्क बैंक खुलने की जानकारी दी। डॉ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ धीरज सेन ने कहा कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में मां के दूध को लेकर समाज में अलग अलग तरह की भ्रांतियां हैं एवं शिशुओं को दूध पिलाने के सही तौर तरीके ज्यादातर माताओं को नहीं पता हंै। ऐसे में एमसीएच विंग के एफसीसी केंद्र में दूधधात्री माताओं को दूध पिलाने के तौर तरीके और साफ सफाई के बारे में जानकारी दी जाती है। इसी के साथ स्तनपान कराने वाली माताओं की काउंसलिंग की जाती हैं। डॉ सारांश सबल ने मां के दूध में पोषक तत्वों और प्रमुख बीमारियों से लडऩे की क्षमता के बारे मे जानकारी दी। डिप्टी कंटोलर डॉ ओपी दायमा एवं नर्सिंग अधीक्षक राधेश्याम शर्मा ने भी स्तनपान को लेकर जानकारी दी। इस दौरान माताओं को स्तनपान कराने के सहीं जानकारी का ऑडियो वीडियो डेमो भी दिया गया।





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