सीकर. जरूरतमंद व भामाशाह कार्ड धारियों को निशुल्क इलाज देना निजी अस्पतालों को महंगा पड़ गया है। स्थिति चौंकाने वाली है कि इनको उपचार देने के बावजूद अस्पताल संचालकों के पांच करोड़ से अधिक रुपए बीमा कंपनी के पास गिरवी पडे़ हैं। इतनी मोटी राशि का भुगतान नहीं होने पर भी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने चुप्पी साध रखी है। वहीं अस्पताल संचालकों का आरोप है कि योजना के नाम पर भष्टाचार हो रहा है और बीमा कपंनी के पदाधिकारी उनका शोषण कर आर्थिक प्रताडऩा दे रहे हैं। एेसे में योजना से जुडे़ अस्पताल संचालकों ने सामूहिक बहिष्कार का निर्णय ले लिया है और मंगलवार रात १२ बजे बाद वे किसी भी रोगी का रजिस्ट्रेशन भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में नहीं करेंगे। संघर्ष की लड़ाई वे तब-तक जारी रखेंगे- जब-तक उनका अटका हुआ क्लेम उन्हें मिल नहीं जाता।
66 अस्पताल में नहीं मिलेगा इलाज
सरकार की इस कल्याणकारी योजना से जिलेभर के करीब ६६ अस्पताल जुडे़ हैं। जिनमें निजी अस्पतालों की संख्या ज्यादा है। भामाशाह प्राइवेट हॉस्पिटल एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. बीएल रणवां का कहना है कि बीमा कंपनी के पास संचालकों के पांच करोड़ रुपए अटके पडे़ हैं। जिनको बेवजह रोक रखा है। जबकि कई संचालकों ने अस्पताल खोलने के लिए ऋण लाखों रुपए ब्याज पर उठाए थे। इधर, एसोसिएशन पदाधिकारी डा. महेंद्र बुडानिया के अनुसार योजना से जुडऩे के बाद उनके अकेले के एक करोड़ से ज्यादा रुपए बीमा कंपनी ने रोक रखे हैं। जबकि उन लोगों ने बीमार व्यक्ति का इलाज कर उन्हें राहत पहुंचाई है।
500 मरीज होंगे प्रभावित
योजना के तहत जुडे़ हुए अस्पतालों में प्रतिदिन करीब ५०० मरीजों को उपचार के लिए भर्ती किया जा रहा है। एेसे में यदि उनका इलाज भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत नहीं किया जाता है तो वे बेहतर सेहत के लिए सुविधा का फायदा उठाने से महरूम हो सकते हैं। इनमें कई एेसे भी हैं। जिनका ऑपरेशन बुधवार या उसके बाद होने की संभावना है।
यह है योजना
भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ उन जरूरतमंदों को दिया जाता है, जो खाद्य सुरक्षा योजना के लिए चयनित हैं और दो रुपए किलो गेंहू सरकारी राशन की दुकान से उठा रहे हैं। इनके परिवार से जुड़ा कोई भी सदस्य साल में ३० हजार से लेकर तीन लाख रुपए तक का इलाज निशुल्क हासिल कर सकता है। इनका उपचार करने वाले निजी अस्पताल संचालक को इलाज के बदले संबंधित बीमा कंपनी यह रुपया देती है।
बहिष्कार के लगाए बैनर
अटके हुए क्लेम के विरोध में संचालकों ने सोमवार को अपने निजी अस्पताल के बाहर बैनर व पोस्टर लगाकर योजना का लाभ रोगी को नहीं मिलने की चेतावनी दी। ताकि उपचार के लिए आने वाले मरीज को यह पता रहे कि मंगलवार से उसका यहां निशुल्क उपचार नहीं हो सकेगा।
इनका कहना है:
बीमा कंपनी द्वारा निजी अस्पतालों के बकाया चल रहे करोड़ों रुपए के भुगतान करने का पत्र विभाग के उच्च अधिकारियों को लिखा है। इनके द्वारा योजना के बहिष्कार करने से भी अवगत करा दिया गया है। उम्मीद है इनकी समस्या का शीघ्र समाधान होगा और बाकी मांगों पर भी विचार किया जाएगा।
डा. अजय चौधरी, सीएमएचओ।





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