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रंगमंच पर अभिनय चुनौती, नाटक में नहीं होता री-टेक - माथुर

बीकानेर. रंग अभिनेत्री प्रीता माथुर ने कहा कि रंगमंच ही अभिनय की अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम है। रंगमंच पर अभिनय करना किसी चुनौती से कम नहीं है, जहां कलाकार को कोई री-टेक नहीं मिलता। बुधवार को बीकानेर पहुंची माथुर ने राजस्थान पत्रिका से बातचीत में अपने स्मरण साझा किए।

 

मुम्बई से अपनी संस्था अंक के साथ बीकानेर में नाटक 'हाय मेरा दिलÓ में प्रस्तुति देने आई माथुर ने बताया कि तीन दशक से वे रंगमंच से जुड़ी हैं। वर्तमान में लोगों में नाटकों के प्रति रुझान बढ़ा है, कलाकार भी आगे आ रहे हैं, संस्थाएं भी कार्य कर रही है, इसके बावजूद संसाधनों से युक्त रंगमंचों का आज भी अभाव है।

 

माथुर ने बताया कि भले ही युग डिजिटल का है, माध्यम बहुत हैं। चाहे फिल्म, टीवी या वेब पोर्टल हो, लेकिन रंगमंच का कोई विकल्प नहीं है। यह एक लाइव शो है, इसमें कलाकारों को मंच पर सजीव अभिनय करते हुए देख सकते हैं। आज प्रयोगात्मक, हास्य-व्यंग्य, गंभीर सभी तरह के नाटक मंचित हो रहे हैं। दर्शक भी जुट रहे हैं। माथुर रंगमंच के अलावा टीवी पर कश्मकश, कशिश धारवाहिक एवं दामिनी सरीखी फिल्मों में अभिनय कर चुकी हैं।

 

चार दशक पहले रखी नींव
माथुर ने बताया कि 42 साल पहले उनके पति अभिनेता दिनेश ठाकुर ने 'अंकÓ संस्थान की नींव रखी थी। तब का दौर ही अलग था। बीकानेर में गुरुवार को मंचित होने वाला नाटक हाय मेरा दिल उनकी देन है। इसका निर्देशन भी उन्होंने ही किया था। आज भले ही वे दुनिया में नहीं है, लेकिन उनका सपना, उनका रंगमंच कलाकारों व दर्शकों के दिलों पर राज करता है।

 


रेल थिएटर फेस्टिवल आज से

रेलवे प्रेक्षागृह में उत्तर पश्चिम रेलवे के तत्वावधान में गुरुवार से थिएटर फेस्टिवल शुरू होगा। चार दिन चलने वाले फेस्टिवल का आगाज मुम्बई के नाटक 'हाय मेरा दिलÓ से होगा। चार दिवसीय उत्सव में 'खेजड़ी की बेटीÓ, 'मुझे अमृता चाहिएÓ का मंचन किया जाएगा। अंक संस्थान के नाटक 'हाय मेरा दिल' को राजस्थान के रणवीर सिंह ने लिखा है, इसका निर्देशन दिनेश ठाकुर ने किया है। आयोजन को लेकर मंडल रेल प्रबंधक एके दूबे, सुरेश खत्री, सुधेश व्यास आदि भागीदारी निभा रहे हैं।



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