चित्तौडग़ढ़. चित्तौड़ दुर्ग स्थित गोमुख कुण्ड में रविवार को पैर फिसलने से डूबे पर्यटक युवक का शव सोमवार को सुबह निकाल लिया गया। मृतक का पिता डूबने से आधे घंटे पहले खिंचावाई गई बेटे की अंतिम फोटो को कलेजे से लगाकर बिलख पड़ा।पाली जिले में फालना के पास स्थित धणी गांव से पचास पर्यटकों को लेकर एक बस रविवार को सुबह यहां चित्तौड़ दुर्ग पहुंची थी। इन पर्यटकों में धणी निवासी लखाराम राव का बीस वर्षीय पुत्र महेन्द्र राव उर्फ डायाराम भाट भी शामिल था। पर्यटकों में महेन्द्र के दूर के रिश्ते की भाभी विमला भी शामिल थी। महेन्द्र भाभी को बताए बिना ही दुर्ग स्थित गोमुख कुण्ड पहुंच गया। अपने कपड़े व जूते रखने के बाद वह कुण्ड की तरफ चला गया। सीढियों के पास पहुंचा तो अचानक पैर फिसलने से वह पानी में डूबकर गहराई तक चला गया। उसे डूबता देख वहां मौजूद एक बालिका चिल्लाई तो वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई। बाद में पुलिस मौके पर पहुंची और गौताखोरों ने तलाश शुरू की, लेकिन रात तक उसे बाहर नहीं निकाला जा सका था। सोमवार को एएसआई राजूसिंह व किला चौकी से सिपाही तंवरसिंह गौताखोरों को लेकर गोमुख कुण्ड पहुंचे और सुबह जल्दी ही फिर रेस्क्यू शुरू किया। सुबह करीब सवा नौ बजे गौताखोर कीरखेड़ा निवासी चेनराम कीर व उसके एक साथी ने महेन्द्र का शव ढूंढ निकाला। गौताखोरों ने जैसे ही शव को कुण्ड से बाहर निकाला, मृतक के पिता लखाराम व भाभी विमला बिलख पड़े। पुलिस ने शव को सांवलियाजी राजकीय सामान्य चिकित्सालय पहुंचाया, जहां पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया।
अंत समय की फोटो देख बिलखे पिता
अस्पताल की मोर्चरी में जब शव का पोस्टमार्टम किया जा रहा था, तब मृतक का पिता अपने बेटे की ओर से डूबने से महज आधे घंटे पहले घोड़े पर बैठकर खिंचावाई गई फोटो देखकर बिलख रहे थे। महेन्द्र की जीवित अवस्था में खिंचवाई गई यह अंतिम फोटो थी।
पिता का सहारा था महेन्द्र
मृतक महेन्द्र बहुत ही गरीब परिवार से था। नवीं कक्षा तक पढाई करने के बाद वह मार्बल घिसाई का काम करके घर-परिवार चलाने में पिता की मदद करता था। घर में बड़ा बेटा होने के नाते वह पिता का सहारा बन चुका था। उसके एक छोटा भाई है और पिता पाली जिले के सादड़ी में चौकीदारी का काम करते हैं।





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