अजमेर.
देश में मॉब लिंचिंग के बढ़ते मामलों का ईदुल जुहा पर भी असर दिखाई देने लगा है। कई प्रदेशों में गाय और भैंस को खरीदना तो दूर बल्कि इनके नाम से ही घबराहट हो रही है। उधर बकरीद पर बिकने वाले बकरे और दुम्भों की बिक्री पर भी असर दिखा है। आसमान छूती कीमतों के चलते बकरों और दुम्भों का बाजार इस बारकुछ कमजोर है।
ईदुल जुहा या बकरीद वास्तव में खुदा की राह में अपनी सबसे प्रिय वस्तु की कुर्बानी का पर्व है। बरसों से बकरीद पर बकरे, दुम्भों की कुर्बानी देकर मुस्लिम धर्मावलम्बी पर्व मनाते हैं। इसमें गंगा-जमनी तहजीब और सर्वपंथ समभाव भी झलकता रहा है। लेकिन बीते एक-दो साल में अचानक हालात बदल गए हैं। खासतौर पर उन्मादी भीड़ के किसी को भी पीट-पीट कर मार डालने की घटनाएं बढ़ गई है। उत्तर प्रदेश के बिसहड़ा से लेकर राजस्थान के अलवर तक ऐसे शर्मनाक मामले हो चुके हैं। इसका सीधा असर पर्वों-त्यौंहार पर भी दिखाई देने लगा है।
नहीं हो रहा गाय-भैंस का निर्यात
देश के दक्षिणी और अन्य प्रांतों में पशुपालक गाय-भैस खरीदने से भी कतरा रहे हैं। इसे मॉब लिंचिंग का असर भी कहा जा सकता है। मॉब लिंचिंग घटनाओं के चलते ट्रकों की जगह-जगह जांच हो रही है। पशुपालक और लोग खुलकर नहीं बोल रहे, लेकिन उनका मानना है, कि गाय-भैंस के निर्यात में दिक्कतें आ रही हैं। जिन प्रांतों में ऐसी परेशानी है वहां बकरे और दुम्भे भेजे जा रहे हैं।
आसमान छूती कीमत
अजमेर की ब्यावर रोड बकरा मंडी में इन दिनों बकरों और दुम्भों की कीम आसमान छू रही है। बकरा व्यवसाइयों का मानना है, कि पिछले साल की तुलना में बकरों और दुम्भों की कीमत दो से तिगुनी बढ़ चुकी है। यहां दस हजार से दो लाख रुपए तक बकरे बिक रहे हैं। इनकी खरीददारी आमजन की पहुंच से बाहर हो रही है। जबकि बकरा मंडी में बकरों और दुम्भों की तादाद कम नहीं हुई है।
परिवहन भी हो रहा कम
इस बार ईदुल जुहा पर बकरों और दुम्भों का परिवहन भी कम हुआ है। बकरा मंडी में महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पंजाब और अन्य राज्यों से बकरों-दुम्भों की ज्यादा आवाजाही नहीं हुई है। यही हाल राजस्थान से भेजे जाने वाले बकरों-दुम्भों का है। बाजार में मांग नहीं होने से भी बकरों की बिक्री पर काफी असर दिखा है।





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