सीकर. .विकास के लिए मिलने वाले फंड पर जल स्वावलंबन अभियान के नाम पर सरकार ने कुंडली मार रखी है। जिले के आठ विधायकों के कोटे में से सवा सात करोड़ रुपयों पर सरकारी ताला लगा हुआ है। विधायक इस पैसे को दूसरे विकास कार्यों में खर्च करना चाह रहे हैं लेकिन सरकार ने इसे केवल मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन के लिए आरक्षित कर रखा है।
चुनावी आचार संहिता के बाद यह पैसा काम नहीं आएगा।जानकारी के अनुसार प्रदेश में मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के लिए विधायकों के फ ण्ड की 25 फ ीसदी राशि सरकार ने आरक्षित की थी। उक्त राशि मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के कार्यों में ही खर्च होनी हैं। जिले के विधायकों की ओर से इस योजना के लिए फंड का इस्तेमाल बहुत ही कम किया गया। यहां तक कि सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी इसका उपयोग नहीं किया। मुख्यमंत्री जल स्वावलबंन अभियान का तीसरा चरण पूरा हो गया। अब इस योजना में कोई पैसा खर्च नहीं हो सकेगा। जब तक इस बजट को सामान्य श्रेणी में नहीं दिया जाएगा तब तक दूसरे विकास कार्यों में भी यह पैसा खर्च नहीं होगा। ऐसे में जिले के आठ विधायकों के करीब 7 करोड़ 29 लाख रुपए इसी श्रेणी में आरक्षित पड़े है। विधायक चाह कर भी इन पैसों का कोई इस्तेमाल नहीं कर पा रहे है।
यह है विधायकों के फ ण्ड की स्थिति
नन्द किशोर महरिया 119.75 लाख
गोविन्द सिंह डोटासरा 112.9 लाख
रतनलाल जलधारी 58.11 लाख
गोवर्धन वमा 103.00 लाख
प्र्रेम सिंह बाजौर 71.84 लाख
बंशीधर बाजिया 101.65 लाख
नारायण सिंह 92.43 लाख
झाबर सिंह खर्रा 70 लाख
कुल 730.80 लाख
दो दिन पहले ही विभाग में की है शिकायत
लक्ष्मणगढ़ विधायक व प्रतिपक्ष के सचेतक गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि प्रदेश भर में दो सौ करोड़ रुपए ’यादा पैसा इसकी वजह से आरक्षित है। दो दिन पहले ही पंचायतीराज विभाग को लिखित में दिया है कि यह पैसा सामान्य श्रेणी में हस्तांतरित किया जाए। जिससे विधायक विकास कार्यों में यह पैसा लगा सकें।
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करीब सवा सात करोड़ रुपए की राशि ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग सामान्य श्रेणी में हस्तान्तरित करें तो यह राशि जनता के काम आ सकती है। आचार संहिता लगने के बाद उक्त राशि का प्रयोग वर्तमान विधायक नहीं कर सकेंगे।
भाजपा विधायकों के भी यह हाल
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने प्रदेश में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान में विधायक कोष से राशि जारी करने के लिए सभी विधायकों को पत्र लिखें। उसके बाद भी विधायकों की ओर से राशि जारी नहीं करने पर ग्रामीण विकास विभाग ने आदेश जारी कर कुल राशि का 25 प्रतिशत हिस्सा एमजेएसए के तहत देना अनिवार्य कर दिया। अनिवार्य होने व मुख्यमंत्री की अपील के बावजूद भी भाजपा विधायकों ने भी एमजेएसए में बजट नहीं दिया। जिले के कांग्रेस व निर्दलीय विधायकों के अलावा भाजपा विधायकों के भी लगभग चार करोड़ रुपए खाते में पड़े हुए है। ऐसे में एमजेएसए में अपेक्षा के अनुरूप बजट नहीं मिल सका।





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