सीकर. कॉमनवेल्थ गेम्स में देश को पदक दिलाने वाले मंदीप जांगड़ा का कहना है कि बचपन में उन्हे काफी गुस्सा आता था। इसलिए उन्होंने दूसरे पर गुस्सा निकालने के लिए बॉक्सिंग सीखी। इसके बाद लंबे सफर और संघर्ष के बीच कॉमनवेल्थ गेम्स सहित कई में पदक भी जीते।
सीकर आए जांगड़ा ने पत्रिका से बातचीत में उन्होंने साझा किए। उन्होंने कहा कि किसी भी खेल में ताकत से ज्यादा आत्मविश्वास की जरूरत होती है। जब तक व्यक्ति अंदर से मजबूत नहीं है वह खुद कुछ नहीं कर सकता है। जांगड़ा ने कहा कि प्रांरभिक कक्षाओं तक उनका खेलों से कोई लगाव नहीं था। लेकिन छठी कक्षा के कुछ विद्यार्थियों को देखा जो बॉक्सर बनने का सपना देख रहे थे।
इन्हीं दिनों मेरे भी जुनून हुआ कि यह खिलाड़ी जब बॉक्सिंग कर सकते है तो मैं क्यो नहीं। इसके बाद हरियाणा की विभिन्न खेल एकेडमी में अभ्यास किया। वह बताते है कि कई बार लोग कमेन्ट्स करते तो उनको रिंग में बुलाकर बॉक्सिंग करते। जांगड़ा ने कहा कि राजस्थान और हरियाणा की खेल नीति में ज्यादा कुछ अंतर नहीं है।
युवाओं को यह समझाना होगा कि खेलों में भी कॅरियर है। निशुल्क प्रशिक्षण के लिए राजस्थान को चुनने के पीछे उन्होंने मुख्य वजह यहां के युवाओं की सक्सेस रेट ज्यादा होना बताया है। उन्होंने बताया कि एकेडमी छात्र व छात्रा दोनों को प्रवेश दिया जाएगा।
एसबीएस एकेडमी में वार्ता के दौरान उन्होंने हरियाणा की खेल एकेडमी व वहां के खेलों के माहौल के बारे में भी बताया। इस दौरान छात्रनेता कानाराम जाट, श्रीराम बिजाराणियां, यशपाल गुर्जर, पंकज चिराना, चुन्नीलाल राड़ सहित अन्य मौजूद रहे।
शेखावाटी में जल्द खुलेगी एकेडमी
जांगड़ा का कहना है कि शेखावाटी के खिलाडिय़ों के लिए कुछ करना चाहते हंै। इसके लिए वह दो दिन से सीकर जिले में बॉक्सिंग एकेडमी के लिए जगह तलाशने में जुटे हंै। जल्द सीकर में बॉक्सिंग एकेडमी शुरू होगी। इसमें युवाओं को पूरी तरह निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा।
राजस्थान में खिलाडिय़ों की कमी नहीं
जांगड़ा ने कहा कि राजस्थान में खिलाडिय़ों की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता बस खिलाडिय़ों को राह दिखाने की है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के युवाओं में सफलता का जुनून है। वह जिस भी फिल्ड में जाने की ठान लेते है वहां सफलता के झंडे जरूर गाड़ते है।





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